झालाना 200 फीट रोड पर NGT की बड़ी कार्रवाई, वन भूमि मामले में जांच शुरू
झालाना लेपर्ड रिजर्व से जुड़ी 200 फीट रोड पर बड़ा मोड़। NGT ने नोटिस जारी किए, जांच समिति बनाई और निर्माण गतिविधियों पर सख्त निर्देश दिए।

6 जुलाई 2026 | नेचर टाइम्स | जयपुर
जयपुर। राजधानी जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र में झालाना लेपर्ड रिजर्व की सीमा से सटी 200 फीट सड़क और उससे जुड़ी 0.858 हेक्टेयर प्रत्यावर्तित वन भूमि का बहुचर्चित मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), सेंट्रल ज़ोन, भोपाल की निगरानी में पहुंच गया है। वर्ष 2009 में सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत वन भूमि डायवर्जन, फॉरेस्ट क्लियरेंस की शर्तों के पालन, सड़क की वास्तविक चौड़ाई, भूमि के विधिक दर्जे तथा कथित व्यावसायिक उपयोग को लेकर उठे गंभीर प्रश्नों पर एनजीटी ने मामले को महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दा मानते हुए सभी संबंधित विभागों एवं पक्षकारों को नोटिस जारी कर दिए हैं। साथ ही केंद्र एवं राज्य स्तर के अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित कर चार सप्ताह में स्थल निरीक्षण के बाद तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2009 में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा एपेक्स अस्पताल से जगतपुरा रेलवे ओवरब्रिज तक प्रस्तावित 200 फीट सड़क निर्माण के लिए 0.858 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, जिसे केंद्र सरकार ने निर्धारित शर्तों के साथ स्वीकृति प्रदान की थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि स्वीकृति की प्रमुख शर्तों के अनुसार भूमि का विधिक स्वरूप यथावत रहना था, सड़क के दोनों ओर वृक्षारोपण किया जाना था तथा डायवर्ट की गई वन भूमि का उपयोग केवल सड़क निर्माण के लिए ही किया जा सकता था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बाद में मौके पर लगभग 160 फीट सड़क का निर्माण किया गया तथा शेष भूमि के उपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न उत्पन्न हुए। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में परिवर्तन, भूमि उपयोग तथा कुछ व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर फॉरेस्ट क्लियरेंस की शर्तों के उल्लंघन की आशंका है। इन आरोपों की सत्यता की जांच अब न्यायिक निगरानी में होगी।

सुनवाई के दौरान एनजीटी ने स्पष्ट कहा कि याचिका में एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रश्न (Substantial Issue of Environment) उठाया गया है। न्यायाधिकरण ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय (जयपुर), प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय तथा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित की है। समिति को मौके का निरीक्षण कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को इस समिति का नोडल एजेंसी बनाया गया है।
एनजीटी ने सभी संबंधित विभागों एवं पक्षकारों को भी चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। वहीं अंतरिम आवेदन पर सुनवाई करते हुए न्यायाधिकरण ने संबंधित क्षेत्रीय वन अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि केवल वही गतिविधियां संचालित हों जो विधिक रूप से अनुमत हैं तथा अनुमति की सीमा से बाहर किसी भी निर्माण या गतिविधि को तत्काल रोका जाए।

उल्लेखनीय है कि इस पूरे प्रकरण को लेकर पूर्व में भी वन विभाग ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर स्वामित्व, वैध कब्जे तथा निर्माण से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अब एनजीटी की निगरानी में संयुक्त जांच शुरू होने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आने वाले सप्ताहों में संयुक्त समिति की रिपोर्ट और संबंधित विभागों के जवाब यह तय करेंगे कि फॉरेस्ट क्लियरेंस की शर्तों, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 तथा भूमि उपयोग से जुड़े आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है।
यह मामला अब केवल जगतपुरा की 200 फीट सड़क का विवाद नहीं माना जा रहा, बल्कि वन भूमि संरक्षण, सार्वजनिक भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन, पर्यावरणीय कानूनों के अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही की व्यापक परीक्षा बन गया है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें संयुक्त समिति की रिपोर्ट और 7 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले की आगे की दिशा तय हो सकती है।


