राजस्थान वन विभाग में बढ़ता आक्रोश, अरण्य भवन में गरजा विरोध
राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना, समर्पित अवकाश भुगतान और पदोन्नति को लेकर कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन, नए तकनीशियन संघ के गठन से बढ़ी सक्रियता

नेचर टाइम्स | जयपुर | 27 मई 2026
विशेष रिपोर्ट : सुमित जुनेजा
जयपुर। “राजस्थान वन विभाग कर्मचारी आंदोलन” राजस्थान वन विभाग में कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अब माहौल लगातार गरमाता दिखाई दे रहा है। जयपुर स्थित अरण्य भवन और अरावली भवन में मंगलवार को जिस तरह लगातार तीसरे दिन कर्मचारियों ने सामूहिक कार्य बहिष्कार, रैली और प्रदर्शन किया, उसने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब वन कर्मचारियों के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेश अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ के आह्वान पर कर्मचारियों ने एक घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और लंबित मांगों पर तुरंत निर्णय लेने की मांग उठाई।
वन कर्मचारियों में बढ़ता असंतोष
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के बीच सबसे अधिक चर्चा आरजीएचएस योजना के निजीकरण, समर्पित अवकाश के भुगतान पर लगी कथित रोक, लंबित सुविधाओं, भत्तों और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर रही। विभागीय समिति वन विभाग के महामंत्री चेतन कुमार नूनीवाल ने साफ कहा कि लगातार कर्मचारियों की सुविधाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर डालने वाले निर्णयों से कर्मचारियों में भारी नाराजगी बढ़ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वन विभाग जैसे संवेदनशील और जोखिमपूर्ण क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को आज भी कई मूलभूत सुविधाओं और सम्मानजनक व्यवस्थाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
अरण्य भवन में तीसरे दिन भी विरोध
इधर अरण्य भवन में वन विभाग के तकनीशियन कर्मचारियों की बैठक ने भी विभागीय हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। विभिन्न जिलों से पहुंचे कर्मचारियों ने पुराने संगठनों को विलोपित कर “राजस्थान वन अधीनस्थ तकनीशियन कर्मचारी संघ” नाम से नए संगठन के गठन का निर्णय लिया। कर्मचारियों का मानना है कि अब तकनीकी कर्मचारियों की समस्याओं, पदोन्नति, कैडर, भत्तों और सेवा संबंधी मामलों को अधिक मजबूती से उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है। बैठक में गोपाल लाल शर्मा को प्रदेशाध्यक्ष, जगदीश प्रसाद झा को प्रदेश महामंत्री, रामरूप गुर्जर को प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा गंगा सिंह को संरक्षक मनोनीत किया गया।

वन विभाग के कर्मचारियों के बीच अब यह भावना तेजी से दिखाई दे रही है कि लंबे समय से लंबित मुद्दों को लगातार उठाने और संगठित रूप से आवाज बुलंद करने के बिना समाधान निकलना मुश्किल होगा। कर्मचारियों का कहना है कि जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाले फील्ड स्टाफ को ही यदि लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ेगा तो इसका असर विभागीय कार्यों और मनोबल दोनों पर दिखाई देना स्वाभाविक है।
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारी नेताओं शेर सिंह यादव, देवेंद्र नरुका, ओमप्रकाश चौधरी, अजयवीर सिंह, प्रकाश यादव, फतेह बहादुर, गोपाल शर्मा, जितेंद्र सिंह और शंभू सिंह सहित कई पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। विभागीय स्तर पर यह भी चर्चा तेज हो गई है कि वन कर्मचारियों के भीतर बढ़ता यह असंतोष आने वाले समय में सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
मई 2026 का पूरा नेचर टाइम्स ई-पेपर पढ़ें




