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विश्व पर्यावरण दिवस पर राजस्थान का हरित संकल्प, 10 करोड़ पौधे लगेंगे

विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हरियालो राजस्थान अभियान शुरू किया। राज्य सरकार ने 10 करोड़ पौधे लगाने और संरक्षण का लक्ष्य रखा है।

सुमित जुनेजा

विशेष संवाददाता, नेचर टाइम्स

जयपुर | 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजस्थान से पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का एक महत्वपूर्ण संदेश पूरे प्रदेश में प्रसारित हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने झालाना स्थित विश्व वानिकी वृक्ष उद्यान में बरगद का पौधा रोपकर राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘हरियालो राजस्थान’ तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों से प्रकृति संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जन-जन के आंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता बन चुका है। तेजी से बदलती जलवायु, बढ़ते तापमान, घटते जल स्रोत और पर्यावरणीय चुनौतियों के इस दौर में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रकृति संवर्धन जैसे प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो राजस्थान को हरित और पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध राज्य बनाने का सपना साकार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए वर्षा ऋतु के दौरान अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’,एक पेड़ मां के नाम’ तथा ‘हरियालो राजस्थान’ जैसे कार्यक्रम केवल सरकारी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराने वाले जन अभियान हैं। इन अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि तथा पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार स्वच्छ पर्यावरण और सतत विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। राज्य सरकार इसी सोच के साथ हरित विकास की दिशा में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को धरातल पर उतार रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल वन विभाग या सरकार का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। आमजन की भागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण के किसी भी लक्ष्य को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं किया जा सकता।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की मांग है। यदि आज की पीढ़ी वृक्षों, जल स्रोतों और जैव विविधता के महत्व को समझेगी, तभी भविष्य में पर्यावरण संरक्षण की मजबूत नींव तैयार होगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में राजस्थान को हरित प्रदेश के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से 10 करोड़ पौधे लगाने एवं उनके संरक्षण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनके जीवित रहने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर पर वृक्षारोपण अभियान प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाने, भूजल संरक्षण को मजबूती देने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

झालाना के विश्व वानिकी वृक्ष उद्यान में आयोजित इस कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा, सांसद मंजू शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, वन विभाग के अधिकारी, पर्यावरणविद् और प्रकृति प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और वृक्षारोपण को जनभागीदारी से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

विश्व पर्यावरण दिवस पर दिया गया यह संदेश केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजस्थान के हर नागरिक को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराने वाला एक महत्वपूर्ण आह्वान बनकर सामने आया। राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है कि हरियाली, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को विकास की मुख्यधारा में शामिल करते हुए राजस्थान को एक ऐसे प्रदेश के रूप में स्थापित किया जाए, जहां विकास और प्रकृति दोनों साथ-साथ आगे बढ़ें।

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