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World Heritage Day 2026 : राजस्थान की विरासत बनी आकर्षण का केंद्र

फ्री एंट्री के बीच स्मारकों पर उमड़ी भीड़, यूनेस्को धरोहरों ने बढ़ाया पर्यटन का उत्साह

जयपुर, 18 अप्रैल

नेचर टाइम्स डेस्क,

जैसा कि आज संपूर्ण विश्व विश्व विरासत दिवस (World Heritage Day) मना रहा है, विरासत शब्द का स्मरण होते ही हमारे मानस पटल पर सबसे पहले राजस्थान की वह स्वर्णिम छवि उभरती है जहाँ का कण-कण शौर्य, त्याग और वास्तुकला के अद्भुत संगम से अभिसिंचित है। राजस्थान केवल एक राज्य नहीं, बल्कि एक जीवंत संग्रहालय है जहाँ का इतिहास धूल भरी किताबों में नहीं, बल्कि इसकी ऊँची प्राचीरों और झरोखों में सांस लेता है। आज इस विशेष अवसर पर राजस्थान के पर्यटन विभाग ने एक सराहनीय पहल करते हुए राज्य के समस्त स्मारकों और संग्रहालयों में पर्यटकों के लिए नि:शुल्क प्रवेश की व्यवस्था की, जिसके परिणामस्वरूप जयपुर के आमेर किले से लेकर जैसलमेर के सोनार दुर्ग तक जनसैलाब उमड़ पड़ा। यह न केवल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।

फाइल फोटो

राजस्थान की सांस्कृतिक श्रेष्ठता का लोहा पूरी दुनिया मानती है, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची है। वर्ष 2013 में राजस्थान के छह भव्य पहाड़ी किलों— *चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, आमेर, गागरोन और जैसलमेर* — को एक साथ वैश्विक धरोहर घोषित किया गया था। ये किले केवल सैन्य सुरक्षा के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये उस समय की ‘इकोलॉजिकल इंटेलिजेंस’ और जल प्रबंधन प्रणालियों के बेजोड़ उदाहरण हैं। इन किलों के अलावा जयपुर का ‘जंतर-मंतर’ और स्वयं ‘जयपुर परकोटा’ (Pink City) यूनेस्को की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होकर राजस्थान को वैश्विक मानचित्र पर एक विशेष गौरव प्रदान करते हैं।

फाइल फोटो

हालाँकि, राजस्थान की विरासत का विस्तार यूनेस्को की सूची से कहीं अधिक व्यापक है। जोधपुर का भव्य मेहरानगढ़ दुर्ग, जिसे ‘रुडयार्ड किपलिंग’ ने “परियों और फरिश्तों द्वारा निर्मित” बताया था, उदयपुर का सिटी पैलेस और अपनी जटिल ज्यामितीय संरचना के लिए प्रसिद्ध आभानेरी की चांद बावड़ी जैसी धरोहरें आज भी भविष्य के नामांकन के लिए प्रबल दावेदार हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार वर्तमान में ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर-आधारित पर्यटन’ और ‘इंटीग्रेटेड हेरिटेज सर्किट’ के विकास पर निवेश को प्राथमिकता दे रही है, ताकि राजस्थान की आर्थिक उन्नति में विरासत एक मजबूत आधार स्तंभ बनी रहे। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी द्वारा समर्थित ‘लिविंग हेरिटेज’ की अवधारणा इस बात पर जोर देती है कि ये स्मारक केवल निर्जीव ढांचे न रहें, बल्कि एक जीवंत परंपरा के रूप में संरक्षित किए जाएं। 

आज का यह दिवस हमें संकल्प दिलाता है कि हम इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण केवल एक कर्तव्य मानकर नहीं, बल्कि अपनी पहचान के सम्मान के रूप में करें।

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