
सुमित जुनेजा, विशेष संवाददाता | नेचर टाइम्स
जयपुर, 24 सितंबर। प्रतापगढ़ में अवैध गतिविधि के खिलाफ कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रताप सिंह चुंडावत की शहादत ने पूरे राजस्थान वन विभाग को झकझोरने के साथ वनकर्मियों की सुरक्षा को नई प्राथमिकता दी है। जयपुर के अरण्य भवन में प्रदेशभर से पहुंचे अधिकारियों, कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरिजीत बनर्जी सहित अधिकारियों-कर्मचारियों ने पुष्प अर्पित कर चुंडावत को नमन किया। कर्मचारी संगठनों ने उन्हें ‘वन शहीद’ का दर्जा देने की मांग रखी, जबकि विभागीय स्तर से भी इसके लिए अनुशंसा की गई है।

21 सितंबर की रात छोटीसादड़ी क्षेत्र में अवैध रूप से मिट्टी खोदे जाने की सूचना पर चुंडावत अपने स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे थे। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार वहां जेसीबी, ट्रैक्टर और डंपर मिले। कार्रवाई के दौरान एक डंपर चालक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल चुंडावत को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। 22 सितंबर को उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। वन एवं वन्यजीव संरक्षण, रेस्क्यू, वृक्षारोपण और नर्सरी कार्यों में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए विभाग ने उनकी सेवा और बहादुरी को विशेष रूप से रेखांकित किया है।
इस घटना के बाद वन मुख्यालय ने सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के आदेश दिए हैं। अब वनकर्मी अकेले गश्त पर नहीं जाएंगे और गश्ती दल में न्यूनतम दो कर्मचारी सुनिश्चित किए जाएंगे। मोटरसाइकिल पर मौजूद वनकर्मी किसी चार पहिया वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली, LCV, HCV या अर्थ मूवर को स्वयं रोकने का प्रयास नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में निर्धारित एसओपी के अनुसार चार पहिया वाहन और अतिरिक्त स्टाफ की सहायता ली जाएगी।

वन मंडलों में उपलब्ध सरकारी चार पहिया वाहनों को रोटेशन के आधार पर गश्त, अवैध खनन, अतिक्रमण, शिकार की रोकथाम और वन सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार वाहन किराये पर लेने की व्यवस्था भी की जा सकेगी। सरकारी चार पहिया वाहनों में Dash Camera अनिवार्य होगा, जबकि अवैध गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई में कम से कम तीन कर्मचारियों को Body Camera पहनना होगा। कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
यह व्यवस्था केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि उन वनकर्मियों के लिए सुरक्षा कवच बनाने की पहल है जो जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक संपदा बचाने के लिए कई बार संगठित अवैध गतिविधियों का सीधे सामना करते हैं। विभागीय आदेश में पूर्व वर्षों में कर्तव्य के दौरान जान गंवाने वाले वनकर्मी जितेन्द्र सिंह शेखावत और किशोर कुमार को भी याद किया गया है।
अरण्य भवन की श्रद्धांजलि सभा में संयुक्त वन कर्मचारी संघ राजस्थान प्रदेश ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरिजीत बनर्जी को ज्ञापन भी सौंपा। संगठन के प्रेस नोट के अनुसार बनर्जी ने कर्मचारियों की जायज मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और प्रताप सिंह चुंडावत को ‘शहीद का दर्जा’ दिलाने सहित लंबित विषयों पर नियमानुसार राज्य सरकार के स्तर पर प्रयास करने का आश्वासन दिया। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किया कि वन सुरक्षा के लिए मैदान में खड़े प्रत्येक कर्मचारी का सम्मान, संसाधन और सुरक्षा सुनिश्चित होना आवश्यक है।

प्रताप सिंह चुंडावत की शहादत के बाद उठे ये कदम राजस्थान वन विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं—जंगल की रक्षा करने वाले हाथों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। वनकर्मी सुरक्षित होगा तो वन और वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत होगी। अब अपेक्षा यही है कि मुख्यालय से निकले ये आदेश प्रत्येक वन मंडल, रेंज और नाके तक उसी गंभीरता से जमीन पर उतरें।
प्रताप सिंह चुंडावत को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि उनकी शहादत वनकर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और संसाधनों की ऐसी स्थायी व्यवस्था का आधार बने, जिसमें कर्तव्य निभाने निकला कोई भी वनकर्मी स्वयं को अकेला न महसूस करे।




