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बस की डिग्गी में 18 जिंदा पाटागोह! सीकर में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

नागौर से अजमेर ले जाए जा रहे थे संरक्षित वन्यजीव; शिकार में प्रयुक्त पिकअप जब्त, मांस और अंगों की खरीद-बिक्री का खुलासा, तीन आरोपी दो दिन के रिमांड पर।

सुमित जुनेजा | विशेष संवाददाता, नेचर टाइम्स
डेटलाइन: सीकर, राजस्थान | 15 अक्टूबर 2026

राजस्थान में संरक्षित वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ सीकर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नागौर से अजमेर जा रही निजी यात्री बस से 18 जीवित पाटागोह (मॉनिटर लिजार्ड) बरामद किए हैं। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ एक और आरोपी सोहनलाल को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि वन्यजीवों के शिकार में प्रयुक्त पिकअप वाहन भी जब्त कर लिया गया है। इस प्रकरण में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी और एक बाल अपचारी को निरुद्ध किए जाने की कार्रवाई सामने आई है। तीन आरोपियों को दो दिन के रिमांड पर लिया गया है, जिन्हें 16 अक्टूबर को पुनः न्यायालय में पेश किया जाएगा। पाटागोह के मांस और अंगों की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े खुलासों ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

सीकर के उप वन संरक्षक प्रदीप कुमार के निर्देशन में 13 अक्टूबर को वन्यजीव तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया। सहायक वन संरक्षक वन्यजीव सीकर देवेन्द्र सिंह राठौड़ को मुखबिर से सूचना मिली थी कि अजमेर की ओर जाने वाली एक निजी यात्री बस में कुछ व्यक्ति पाटागोह और औषधीय वन उपज शतावरी का अवैध परिवहन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही सहायक वन संरक्षक मुख्यालय सीकर कीर्ति राठौड़ के पर्यवेक्षण एवं सहयोग से विशेष टीम गठित की गई। क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रथम श्रीमाधोपुर जितेन्द्र सिंह चौधरी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने श्रीमाधोपुर क्षेत्र में जालपाली से अजीतगढ़ जाने वाली सड़क पर नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की।

इसी दौरान निजी यात्री बस संख्या RJ09PA2776 को रुकने का इशारा किया गया। बस की तलाशी लेने पर डिग्गी में रखे दो प्लास्टिक के कट्टों से 18 जीवित पाटागोह बरामद हुए। इसके अतिरिक्त एक अन्य कट्टे से औषधीय वन उपज शतावरी तथा लोहे के दो कुरसे भी जब्त किए गए। संरक्षित वन्यजीवों को प्लास्टिक के कट्टों में भरकर यात्री बस से ले जाने का मामला सामने आते ही वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए नेमाराम पुत्र सायरमल बावरी निवासी चितावा जिला नागौर, लादूराम बावरी पुत्र सांवरराम निवासी खोरंडी जिला नागौर तथा रामचन्द्र बावरी पुत्र नंदराम निवासी नगवाड़ा जिला नागौर को गिरफ्तार कर लिया। इसके अतिरिक्त एक बाल अपचारी को भी निरुद्ध किया गया।

वन्यजीव तस्करी के इस मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ एक और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी। वन विभाग ने प्रकरण में संलिप्त एक अन्य आरोपी सोहनलाल को गिरफ्तार करने के साथ शिकार में इस्तेमाल किए गए पिकअप वाहन को भी जब्त कर लिया। पिकअप की बरामदगी से वन्यजीवों को पकड़ने और उनके परिवहन में इस्तेमाल किए गए साधनों की जांच को नई दिशा मिली है। प्रारंभिक कार्रवाई में गिरफ्तार तीन आरोपियों को न्यायालय से दो दिन के रिमांड पर लिया गया है। इन्हें 16 अक्टूबर को पुनः न्यायालय में पेश किया जाएगा।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में वन्यजीवों के अवैध शिकार और खरीद-बिक्री से जुड़ी गंभीर जानकारी सामने आई है। पूछताछ में आरोपियों ने पाटागोह का शिकार मांस खाने और बेचने के लिए किए जाने तथा उसके अंगों की भी बिक्री करने की बात बताई। पाटागोह की खाल का इस्तेमाल ढोल बनाने में किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके अतिरिक्त अवैध रूप से एकत्र की गई औषधीय वन उपज शतावरी को दवाइयों के उपयोग के लिए लगभग 200 रुपये प्रति किलो की दर से बेचे जाने की बात सामने आई। इन खुलासों के बाद वन्यजीवों के शिकार से लेकर उनके संभावित खरीदारों और अवैध व्यापार की कड़ियों तक पहुंचना जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

वन विभाग ने आरोपियों की निशानदेही पर जांच का दायरा बढ़ाते हुए अतिरिक्त बरामदगी भी की। आरोपी रामचन्द्र बावरी की निशानदेही पर चीपलाटा स्थित सोहन बावरी के घर से एक टोपेदार बंदूक तथा शिकार किए गए झाऊचूहे के कांटे बरामद किए गए। शिकार से संबंधित उपकरणों और अन्य सामग्री की बरामदगी के बाद वन्यजीवों के अवैध शिकार में इस्तेमाल किए गए साधनों की जांच भी तेज कर दी गई है। अब शिकार में प्रयुक्त पिकअप वाहन की जब्ती ने पूरे घटनाक्रम में वाहनों की भूमिका को भी जांच के केंद्र में ला दिया है।

गिरफ्तार तीन आरोपियों को 14 अक्टूबर को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, श्रीमाधोपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 16 अक्टूबर तक दो दिन के रिमांड पर लिया गया। वहीं निरुद्ध बाल अपचारी को किशोर न्याय बोर्ड, सीकर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय के आदेश पर उसे संप्रेक्षण एवं बाल सुधार गृह, डिडोर, सीकर भेजा गया। प्रकरण में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 48(ख), 52 एवं 57/51 तथा राजस्थान वन अधिनियम, 1953 की धारा 41, 42 एवं 52(2) के तहत कार्रवाई की गई है। वन्यजीवों का अवैध शिकार, कब्जा, परिवहन और व्यापार गंभीर दंडनीय अपराध हैं। संबंधित प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर तीन से सात वर्ष तक कारावास और आर्थिक दंड का प्रावधान लागू हो सकता है।

एक ही बस से 18 जीवित पाटागोह की बरामदगी ने वन्यजीवों के अवैध शिकार और संभावित तस्करी नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी संख्या में पाटागोह किन क्षेत्रों से पकड़े गए, उन्हें कहां एकत्र किया गया और अजमेर की ओर ले जाने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसकी जांच महत्वपूर्ण हो गई है। शिकार में इस्तेमाल पिकअप वाहन की जब्ती के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि क्या वन्यजीवों को पहले किसी स्थान पर एकत्र कर बाद में यात्री बस के माध्यम से आगे भेजा जा रहा था। इन सभी पहलुओं की जांच से अवैध शिकार और परिवहन की पूरी श्रृंखला सामने आ सकती है।

पाटागोह प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह जीव छोटे वन्यजीवों और अन्य शिकार प्रजातियों की आबादी के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में पाटागोह का शिकार और अवैध परिवहन न केवल वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा है। वन्यजीवों के मांस, खाल और अन्य अंगों की मांग अवैध शिकार को बढ़ावा दे सकती है। इस प्रकार के मामलों में शिकार करने वालों के साथ संभावित खरीदारों और परिवहन में सहयोग करने वालों की पहचान भी आवश्यक है।

सीकर के उप वन संरक्षक प्रदीप कुमार ने वन एवं वन्यजीवों से संबंधित अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि संरक्षित वन्यजीवों का शिकार और तस्करी करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान में सहायक वन संरक्षक मुख्यालय कीर्ति राठौड़, सहायक वन संरक्षक वन्यजीव देवेन्द्र सिंह राठौड़, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रथम श्रीमाधोपुर जितेन्द्र सिंह चौधरी, क्षेत्रीय वन अधिकारी द्वितीय नरेन्द्र सैनी, गोदाराज काजला, शिम्भुदयाल, अजयपाल गजराज, मंगलचन्द भादवा, अशोक, सुरेश और किरण सहित अन्य वनकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सीकर वन विभाग की इस कार्रवाई ने वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क की कई कड़ियों को जांच के दायरे में ला दिया है। पहले यात्री बस से 18 जीवित पाटागोह की बरामदगी, फिर शिकार से संबंधित हथियार और सामग्री का मिलना तथा अब चौथे आरोपी की गिरफ्तारी और पिकअप वाहन की जब्ती ने प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन वन्यजीवों का शिकार किन स्थानों पर हुआ, इन्हें कहां पहुंचाया जाना था और इनके अवैध कारोबार में अन्य किन व्यक्तियों की भूमिका रही। पूरे नेटवर्क तक पहुंचने और संभावित खरीदारों की पहचान होने पर वन्यजीव तस्करी से जुड़े और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

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