कचरा नहीं, अब ‘संसाधन’: राजस्थान में बदलने जा रहा शहरों के Waste Management का पूरा सिस्टम
चार हिस्सों में कचरा अलग करना, थोक उत्पादकों की बढ़ी जिम्मेदारी और डिजिटल निगरानी; नियम तोड़ने पर ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के तहत पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान

सुमित जुनेजा | नेचर टाइम्स | 26 सितंबर 2026
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार
जयपुर। शहरों की स्वच्छता अब केवल कचरा उठाने और उसे भराव स्थल तक पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगी। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत कचरे को स्रोत पर अलग करने से लेकर उसके पुनर्चक्रण, प्रसंस्करण और संसाधन के रूप में इस्तेमाल तक पूरी व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया है। राजस्थान में नियमों के क्रियान्वयन को लेकर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में पत्र सूचना कार्यालय (PIB), जयपुर के सहयोग से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्र सूचना कार्यालय, जयपुर के निदेशक अनुभव बैरवा ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की जानकारी आमजन तक पहुंचना जरूरी है और बेहतर कचरा प्रबंधन स्वच्छ एवं टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल ने नियमों के प्रमुख प्रावधानों, उनके क्रियान्वयन तथा आम नागरिकों, स्थानीय निकायों और थोक अपशिष्ट उत्पादकों की भूमिका की जानकारी दी।
अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने बताया कि नए नियमों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण पर विशेष जोर है। गीला, सूखा, स्वच्छता संबंधी तथा विशेष/घरेलू खतरनाक कचरा अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था से पुनर्चक्रण और अपशिष्ट प्रसंस्करण की पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य है।
स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास के अनुसार निर्धारित सीमा में आने वाले बड़े आवासीय परिसरों, होटलों, संस्थानों और अन्य बड़े अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की गई है। जैविक कचरे के लिए कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण अथवा अन्य अनुमोदित तकनीकों के इस्तेमाल तथा पुनर्चक्रण योग्य और खतरनाक कचरे के अधिकृत माध्यम से प्रबंधन पर जोर रहेगा।

नियमों का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल निगरानी भी है। कचरे के संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण की ऑनलाइन निगरानी विकसित करने की बात कही गई है। सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्रों के जरिए सूखे कचरे से अधिकतम पुनर्चक्रण योग्य सामग्री निकालने और भराव स्थलों पर निर्भरता कम करने पर भी जोर है। उद्योगों में अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन, पुराने विरासत अपशिष्ट स्थलों के वैज्ञानिक उपचार तथा कम्पोस्टिंग और जैव-मीथेनीकरण के जरिए कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं को भी प्रोत्साहित किया गया है।
नियमों में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के तहत उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान भी रखा गया है। यानी कचरा प्रबंधन में लापरवाही को केवल स्वच्छता का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जवाबदेही से भी जोड़ा गया है।

राजस्थान में क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति गठित की जा चुकी है। 29 मई 2026 को आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में लगभग 600 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी शहरी स्थानीय निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीकृत पोर्टल पर थोक अपशिष्ट उत्पादकों का अंतरिम पंजीकरण भी शुरू किया गया है। रियल एस्टेट क्षेत्र में नियमों के अनुपालन के लिए RERA के साथ समन्वय की जानकारी भी दी गई।
कुल मिलाकर नए नियमों का संदेश स्पष्ट है—शहरों का कचरा केवल फेंकने की वस्तु नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण, पुनःउपयोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति के जरिए आर्थिक और पर्यावरणीय मूल्य वाला संसाधन भी बन सकता है। राजस्थान में इसकी सफलता स्थानीय निकायों, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, उद्योगों और नागरिकों की भागीदारी तथा जमीनी स्तर पर नियमों के वास्तविक अनुपालन पर निर्भर करेगी।
स्रोत/साभार: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार।




