पैंगोलिन के शल्कों की तस्करी का राजसमंद में भंडाफोड़, चार गिरफ्तार
सोशल मीडिया के वायरल वीडियो से खुली शिकार की कड़ी; वन्यजीव अपराध नियंत्रण से जुड़े स्वयंसेवकों की सूचना पर वन विभाग ने बिछाया जाल, ₹3 लाख में सौदा तय होने के बाद 199 शल्क बरामद

नेचर टाइम्स इन्वेस्टिगेशन | राजसमंद
वन्यजीव अपराध पर विशेष रिपोर्ट | 23 सितंबर 2026
राजस्थान के राजसमंद जिले में पैंगोलिन के शिकार और उसके शल्कों की कथित तस्करी से जुड़े मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। 22 सितंबर को की गई इस कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से पैंगोलिन के 199 शल्क बरामद किए गए, जिनका कुल वजन करीब 700 ग्राम दर्ज किया गया है। वन विभाग ने दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की हैं। विभागीय दस्तावेज के अनुसार मामले में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 48(A), 49(B) और 51 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो से हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार इंस्टाग्राम पर सुरेश योगी नाम के अकाउंट से एक वीडियो अपलोड हुआ, जिसमें कथित रूप से पैंगोलिन का शिकार करने और उसके शरीर से शल्क निकालने से जुड़ी गतिविधियां दिखाई दीं। वीडियो वायरल होने के बाद इसकी जानकारी वन्यजीव अपराध नियंत्रण से जुड़े स्वयंसेवकों तक पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए संदिग्ध व्यक्तियों और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई।
इसके बाद स्वयंसेवकों और वन विभाग के बीच समन्वय के साथ संदिग्धों तक पहुंचने की रणनीति तैयार की गई। जानकारी के मुताबिक फर्जी ग्राहक बनकर पैंगोलिन के शल्क खरीदने के लिए संपर्क किया गया और करीब तीन लाख रुपये में सौदा तय हुआ। कई दिनों तक चली निगरानी और सूचनाओं के सत्यापन के बाद वन विभाग ने आरोपियों को पकड़ने के लिए टीम गठित की।
डीएफओ रामानंद भाकर के निर्देशन और सहायक वन संरक्षक प्रमोद नारुका के नेतृत्व में गठित टीम में रेंजर लादूराम और जितेंद्र सिंह सहित तुलसीराम, ईश्वर सिंह, लोकेंद्र सिंह, शंकर, हजारी सिंह, राजेंद्र सिंह, विनोद सिंह और रामधन शामिल रहे। 22 सितंबर को टीम ने राजसमंद के भावा गांव के पास कुंवारिया रोड स्थित पेट्रोल पंप के आसपास कार्रवाई की। कथित रूप से शल्कों का सौदा किए जाने के दौरान चार व्यक्तियों को पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान हीरालाल पुत्र दोनालाल निवासी भीलवाड़ा, सुरेश चंद पुत्र नाथूलाल निवासी खातीखेड़ा राजसमंद, लादू पुत्र शंकरलाल निवासी खातीखेड़ा राजसमंद और गोपीलाल पुत्र दयाराम निवासी अर्जुनपुर भीलवाड़ा के रूप में बताई गई है। आरोपियों से बरामद सामग्री को वन विभाग ने अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वन विभाग के‘अपराध की प्रारंभिक सूचना’ में 22 सितंबर 2026 की तारीख के साथ 199 पैंगोलिन शल्क और उनका वजन 700 ग्राम दर्ज किया गया है। इसी दस्तावेज में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत धारा 9, 39, 48(A), 49(B) और 51 का उल्लेख है। चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर मामले में आगे की जांच की जा रही है।
पैंगोलिन भारत के सर्वाधिक संरक्षण प्राप्त वन्यजीवों में शामिल है। इसके शल्कों की अवैध तस्करी लंबे समय से वन्यजीव अपराध नियंत्रण एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती रही है। ऐसे में अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि बरामद शल्क किस पैंगोलिन से प्राप्त किए गए, कथित शिकार कब और कहां हुआ और क्या गिरफ्तार लोगों के संपर्क किसी बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो से शुरू होकर निगरानी, फर्जी ग्राहक के जरिए सौदा और फिर मौके पर गिरफ्तारी तक पहुंची यह कार्रवाई वन्यजीव अपराधों के खिलाफ सूचना तंत्र और वन विभाग की मैदानी कार्रवाई के समन्वय का महत्वपूर्ण मामला बनकर सामने आई है।




