राजस्थान वन विभाग
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राजस्थान वन विभाग में तबादलों की बड़ी कवायद: दिनभर रही बेचैनी, रात 10 बजे खत्म हुआ इंतजार; 65 सहायक वन संरक्षक और 39 उपवन संरक्षकों सहित व्यापक प्रशासनिक फेरबदल

अरण्य भवन से जारी आदेशों के बाद प्रदेशभर में बदली वन अधिकारियों की जिम्मेदारियां, ACF और DFO स्तर पर व्यापक फेरबदल; अब IFS अधिकारियों, रेंजर, वनपाल और फॉरेस्ट गार्ड के संभावित तबादलों पर टिकी विभाग की नजर।

विशेष संवाददाता: सुमित जुनेजा | नेचर टाइम्स | जयपुर

11 जुलाई 2026

राजस्थान वन विभाग में लंबे समय से जिस तबादला सूची का इंतजार किया जा रहा था, आखिरकार वह शुक्रवार देर रात करीब 10 बजे जारी हो गई। सुबह से लेकर देर रात तक वन विभाग मुख्यालय ‘अरण्य भवन’, सचिवालय और प्रदेशभर के वन कार्यालयों में एक ही चर्चा थी—”क्या आज तबादला सूची आएगी?”। अधिकारी और कर्मचारी लगातार एक-दूसरे से फोन पर संपर्क साधते रहे। कोई सचिवालय की गतिविधियों पर नजर रखे हुए था तो कोई मुख्यालय से जानकारी जुटाने में लगा था। पूरे दिन विभागीय गलियारों में असमंजस, उत्सुकता और हलचल का माहौल बना रहा। आखिरकार देर रात जैसे ही आदेश जारी हुए, लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लग गया और विभाग में बहुप्रतीक्षित तबादलों का सिलसिला शुरू हो गया।

राजस्थान वन विभाग ने व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 65 सहायक वन संरक्षकों (ACF) तथा 39 उपवन संरक्षकों (DCF) के तबादला आदेश जारी किए हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यह केवल नियमित स्थानांतरण नहीं, बल्कि वन प्रशासन को अधिक प्रभावी, गतिशील और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इन बदलावों से विभिन्न वन मंडलों, वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, जैविक उद्यानों, वन विकास निगम तथा मुख्यालय स्तर पर प्रशासनिक संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

सहायक वन संरक्षकों की सूची में कई महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। हिंदूराम भाकर को झुंझुनूं से इंदिरा गांधी नहर स्टेज-1, श्रीगंगानगर भेजा गया है। शिवप्रकाश बिश्नोई का उप वन संरक्षक कार्यालय जयपुर से फलौदी, देवेंद्र सिंह राठौड़ का नाहरगढ़ जयपुर से वन्यजीव कार्यालय उप वन संरक्षक सीकर, सोनू बाबू मीणा का करौली मुख्यालय से सहायक वन संरक्षक अलवर तथा महेश कुमार शर्मा का रणथंभौर से केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर तबादला किया गया है।

इसी क्रम में जनेश्वर सिंह चौधरी को श्रीमाधोपुर से कोटपूतली-बहरोड़, गजेन्द्र सिंह को आबूपर्वत-सिरोही से आबूरोड, हरी सिंह हाड़ा को केलादेवी करौली से रामगढ़ विषधारी, बूंदी तथा लखन सिंह राठौड़ को कुंभलगढ़ से पीटीएस अजमेर भेजा गया है। वहीं सौरभ कुमार मंगल को रामगढ़ विषधारी से केलादेवी करौली तथा दिलीप कुमार वर्मा को अलवर से मुकुंदरा राष्ट्रीय उद्यान, कोटा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जारी आदेशों में गोतमलाल मीणा का डूंगरपुर से डूंगरपुर मुख्यालय, मयंक महेरिया का मुकुंदरा राष्ट्रीय उद्यान से जयपुर विकास प्राधिकरण, प्राची चौधरी का चिड़ियाघर जयपुर से झुंझुनूं मुख्यालय, चौथाराम का राजसमंद से अलवर मुख्यालय, प्रशांत कुमार गौड़ का राजगढ़ (अलवर) से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक कार्यालय जयपुर तथा जितेंद्र सिंह शेखावत का चिड़ियाघर जयपुर से नाहरगढ़ जैविक पार्क स्थानांतरण भी प्रमुख रूप से शामिल है।

उपवन संरक्षक स्तर पर भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। मंगल बिश्नोई को जयपुर उत्तर, नरेंद्र सिंह शेखावत को फलौदी, राजेंद्र कुमार गुप्ता को उड़न दस्ता वन्यजीव कोटा, देवेंद्र तिवारी को उदयपुर उत्तर, प्रमोद धाकड़ को वन्यजीव कोटा तथा संजीव शर्मा को रणथंभौर द्वितीय करौली में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा जगदीश गुप्ता, मुकेश जिंदल, उमेश कुमार बंसल, तरुण मेहरा, अनिल कुमार गुप्ता, गजनफर अली, विजयपाल सिंह, दिनेश गुप्ता, बृजमोहन गुप्ता, ओमप्रकाश जांगिड़, चंद्रमोहन गुप्ता, दीपक गुप्ता, अनिल यादव, विष्णु कुमार गुप्ता, शुभम जैन, पंकज गुप्ता, सुरेश मिश्रा, ओमप्रकाश शर्मा, सुनील कुमार, मदन सिंह चारण, रमेश कुमार, गुलजारीलाल जाट, पंकज कसाना, सुरेश गुप्ता, नाहर सिंह, अरुण शर्मा, राकेश दुलार, अभिषेक शर्मा, राजीव गुप्ता, अनुराग भटनागर, सुमित बंसल, वीरेंद्र सिंह तथा पीयूष शर्मा सहित अनेक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।

तबादलों का प्रभाव केवल मुख्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि रणथंभौर, रामगढ़ विषधारी, मुकुंदरा राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, माउंट आबू, जयपुर, अलवर, करौली, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, डूंगरपुर, झुंझुनूं, सीकर, अजमेर और श्रीगंगानगर सहित प्रदेश के अनेक महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों पर दिखाई देगा। कई स्थानों पर नए अधिकारी वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, विकास कार्यों की निगरानी और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए यह दिन लंबे समय तक याद रखा जाएगा। सुबह से शुरू हुई चर्चा, दोपहर तक बढ़ती अटकलें, शाम तक बढ़ती बेचैनी और फिर रात करीब 10 बजे जारी हुए आदेश—इन सबने पूरे विभाग में असाधारण माहौल बना दिया। मोबाइल फोन लगातार बजते रहे, व्हाट्सएप समूहों में सूची की प्रतीक्षा होती रही और जैसे ही आदेश सार्वजनिक हुए, हर कोई अपने नाम, नई तैनाती और सहयोगियों के स्थानांतरण की जानकारी लेने में जुट गया। देर रात तक अरण्य भवन से लेकर जिला मुख्यालयों तक तबादलों की चर्चा ही सबसे बड़ा विषय बनी रही।

वन प्रशासन के जानकारों का मानना है कि यह व्यापक फेरबदल आने वाले समय में विभाग की कार्यशैली पर सीधा प्रभाव डालेगा। नई तैनातियों के साथ अधिकारियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियों का समाधान तथा विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। लंबे इंतजार के बाद जारी हुई यह तबादला सूची अब प्रदेश के वन प्रशासन में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

अब निगाहें अगली तबादला सूचियों पर

वन विभाग में सहायक वन संरक्षक (ACF) और उपवन संरक्षक (RFO) स्तर के व्यापक तबादलों के बाद अब विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की निगाहें अगली प्रशासनिक सूचियों पर टिक गई हैं। विभागीय हलकों में चर्चा है कि आगामी चरण में वन परिक्षेत्र अधिकारियों (रेंजर), वनपाल, सहायक वनपाल तथा वन रक्षकों (फॉरेस्ट गार्ड) के तबादलों की सूची भी जारी हो सकती है। इसके साथ ही भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के संभावित प्रशासनिक फेरबदल को लेकर भी अरण्य भवन से लेकर सचिवालय तक चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। विभागीय कर्मचारियों के बीच यही सवाल सबसे अधिक सुनाई दे रहा है कि अगली सूची कब आएगी और किन अधिकारियों व कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां मिलेंगी। हालांकि इन संभावित तबादलों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन विभागीय गलियारों में इसे लेकर उत्सुकता और चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं।

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