राजस्थान वन विभागवनवन्यजीव
Trending

अरिजीत बनर्जी को ऐतिहासिक विदाई! अरण्य भवन में सम्मान, भावनाओं और यादों का अनूठा संगम

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार की मौजूदगी में राजस्थान वन विभाग के मुखिया का सम्मान; वनकर्मियों की सुरक्षा, कर्मचारी कल्याण और वन्यजीव संरक्षण का गूंजा संदेश।

सुमित जुनेजा | विशेष संवाददाता, नेचर टाइम्स

जयपुर, 31 अक्टूबर 2026।

राजस्थान वन विभाग के इतिहास में शुक्रवार का दिन सम्मान, आत्मीयता और भावनाओं की खूबसूरत यादें छोड़ गया। अवसर था प्रदेश के हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) अरिजीत बनर्जी के सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह का। जयपुर स्थित अरण्य भवन में आयोजित इस समारोह में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों तक की मौजूदगी ने इसे यादगार बना दिया। वर्षों तक प्रदेश के वनों, वन्यजीवों और विभागीय प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने वाले बनर्जी को जब उनके सहयोगियों ने सम्मान और शुभकामनाओं के साथ विदाई दी, तो समारोह में आत्मीयता और भावनाओं का विशेष वातावरण दिखाई दिया।

मुख्य सचिव की मौजूदगी ने बनाया समारोह को ऐतिहासिक

समारोह का सबसे उल्लेखनीय पहलू राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण विभाग आनंद कुमार की उपस्थिति रही। आयोजकों के अनुसार, वन विभाग के किसी सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह में मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव का अरण्य भवन पहुंचना अपने आप में पहला अवसर था। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया और वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के उत्साह को भी बढ़ाया। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अरिजीत बनर्जी के साथ अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने बनर्जी की प्रशासनिक दक्षता, निर्णय लेने की क्षमता, कार्यशैली और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण की सराहना की। उनके संबोधन में एक अनुभवी अधिकारी के साथ काम करने की स्मृतियां और उनके योगदान के प्रति सम्मान स्पष्ट दिखाई दिया।

सेवाकाल की यादों से जुड़ा हर दौर, अनुभव साझा करते हुए भावुक हुए पल

अपने सम्मान समारोह में अरिजीत बनर्जी ने भी सेवाकाल की अनेक महत्वपूर्ण स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) सहित विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के निर्वहन तक के अनुभवों को याद किया। वन विभाग की कार्यप्रणाली, चुनौतियों, उपलब्धियों और प्रशासनिक अनुभवों पर उनके विचारों ने समारोह को केवल औपचारिक विदाई तक सीमित नहीं रहने दिया। बनर्जी के सेवाकाल में वन एवं वन्यजीव संरक्षण, विभागीय प्रशासन को मजबूत बनाने, अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और कर्मचारियों के हितों से जुड़े विषयों पर किए गए प्रयासों को विशेष रूप से याद किया गया। सहयोगियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध और विभागीय समस्याओं के समाधान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण विशेषताओं के रूप में सामने आए।

वन विभाग की असली ताकत उसके मैदानी कर्मचारी, संरक्षण के संकल्प के साथ विदाई

समारोह में एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी उभरकर सामने आया कि वन विभाग की वास्तविक ताकत केवल उसके प्रशासनिक ढांचे में नहीं, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों में है जो कठिन परिस्थितियों में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा करते हैं। प्रदेश के वनों, जैव विविधता और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मैदानी स्तर पर संसाधन बढ़ाने, वनकर्मियों को आधुनिक सुरक्षा उपकरण, वाहन, संचार सुविधाएं और बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। अवैध खनन, वन भूमि पर अतिक्रमण, वन्यजीव अपराध और वन संपदा की अवैध कटाई के विरुद्ध प्रभावी एवं त्वरित कार्रवाई को भी भविष्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया। इसके साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर प्रोत्साहन और सम्मान देने, उनकी पदोन्नति एवं सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान करने तथा सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया। स्थानीय समुदायों, युवाओं और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाकर पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की आवश्यकता भी व्यक्त की गई। समारोह में यह भावना प्रमुखता से सामने आई कि जंगलों की सुरक्षा में दिन-रात जुटे वनकर्मियों का मनोबल, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना वन एवं वन्यजीव संरक्षण के बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव नहीं है।

वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर कर्मचारी संगठनों तक, सभी ने किया सम्मान

समारोह में प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पवन कुमार उपाध्याय, शिखा मेहरा, अनुराग भारद्वाज, के.सी. अरुण प्रसाद, राजेश गुप्ता, टी.जे. कविथा और उदयशंकर सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, उप वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों, विभिन्न कर्मचारी संगठनों के अध्यक्षों, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में वनकर्मियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने अरिजीत बनर्जी को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके स्वस्थ, सुखद और सक्रिय सेवानिवृत्त जीवन की कामना की। समारोह में वरिष्ठता और पद की औपचारिक सीमाओं से अलग सहयोग, सम्मान और आत्मीयता की भावना देखने को मिली। कार्यक्रम का प्रभावशाली और सुव्यवस्थित मंच संचालन सत्यदेव पारीक ने किया। समारोह के अंत में पवन कुमार उपाध्याय ने मुख्य अतिथियों, वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों और उपस्थित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।

पद से विदाई, लेकिन अनुभव और योगदान की छाप रहेगी कायम

अरिजीत बनर्जी की सेवानिवृत्ति के साथ उनके लंबे शासकीय सेवाकाल का एक महत्वपूर्ण अध्याय पूरा हुआ, लेकिन वन विभाग के साथ उनका जुड़ाव, प्रशासनिक अनुभव और सहयोगियों के बीच बनी आत्मीयता की स्मृतियां इस अवसर को विशेष बनाती हैं। अरण्य भवन का यह सम्मान समारोह केवल एक वरिष्ठ अधिकारी की विदाई नहीं, बल्कि उस कार्यसंस्कृति के प्रति सम्मान का अवसर भी बना, जिसमें आपसी विश्वास, सहयोग, कर्मचारी हित और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को महत्व दिया जाता है।

वन बचेंगे तो वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे तो प्रकृति का संतुलन बना रहेगा और प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होगा। इसी संकल्प और शुभकामनाओं के साथ राजस्थान वन विभाग ने अपने निवर्तमान मुखिया अरिजीत बनर्जी को सम्मानपूर्ण विदाई दी।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!