वन्यजीव सप्ताह 2026 का समापन: जयपुर, सरिस्का और रणथम्भौर में प्रतिभाओं का सम्मान
जमवारामगढ़ में करीब 1000 विद्यार्थियों की भागीदारी, सरिस्का में विजेताओं को पुरस्कार; सवाई माधोपुर में वन अधिकारियों ने दिया वन्यजीव संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश

नेचर टाइम्स | विशेष रिपोर्ट | 9 अक्टूबर 2026
जयपुर/सवाई माधोपुर/सरिस्का। वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने के संदेश के साथ राजस्थान में वन्यजीव सप्ताह 2026 के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का 8 अक्टूबर को समापन हुआ। जयपुर के रेंज जमवारामगढ़, सरिस्का टाइगर रिजर्व और सवाई माधोपुर स्थित राजीव गांधी क्षेत्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। कहीं बच्चों ने चित्रों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया, तो कहीं प्रश्नोत्तरी और निबंध प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाई। समापन समारोहों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया और प्रकृति संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया।
जमवारामगढ़ में करीब एक हजार विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा, विजेताओं का हुआ सम्मान
जयपुर वन्यजीव क्षेत्र की रेंज जमवारामगढ़ में 8 अक्टूबर को वन्यजीव सप्ताह का समापन समारोह आयोजित किया गया। वन्यजीव सप्ताह के दौरान जमवारामगढ़, रायसर और अजबगढ़ क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में प्रश्नोत्तरी, चित्रकला, निबंध लेखन सहित अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं में कक्षा 6 से 8 तथा कक्षा 9 से 12 तक के करीब एक हजार विद्यार्थियों ने भाग लेकर वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति अपनी जागरूकता का परिचय दिया।

प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम तीन स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को पौधारोपण, पेड़ों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए भी प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में उप वन संरक्षक जगदीश चन्द गुप्ता ने विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को पौधारोपण के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिकाधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संदेश दिया।
इस अवसर पर सहायक वन संरक्षक तरुण प्रकाश, क्षेत्रीय वन अधिकारी पंकज शर्मा, कुलदीप सिंह चौहान सहित वन विभाग के कर्मचारी, विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सरिस्का में वन्यजीव संरक्षण का संदेश, विजेता विद्यार्थियों को मिले पुरस्कार
सरिस्का टाइगर रिजर्व में भी 8 अक्टूबर को वन्यजीव सप्ताह का समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक संग्राम सिंह कटियार तथा उप वन संरक्षक अभिमन्यु सहारण सहित सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्राधिकारी और अन्य वनकर्मी उपस्थित रहे। विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। वन्यजीव सप्ताह के दौरान सरिस्का टाइगर रिजर्व में विद्यार्थियों के लिए फोटोग्राफी, निबंध लेखन, चित्रकला और खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त जागरूकता कार्यक्रमों और नेचर गाइडों के लिए प्रशिक्षण सत्र जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं।

समापन समारोह में वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को प्रशंसा-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कटियार ने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का साझा दायित्व है। उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए विद्यार्थियों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और संरक्षण का संदेश अपने परिवार एवं समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।
सरिस्का में आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन्यजीवों के महत्व से परिचित कराने के साथ ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनाना रहा।
सवाई माधोपुर में वन्यजीव सप्ताह का समापन, विद्यार्थियों को किया सम्मानित
सवाई माधोपुर स्थित राजीव गांधी क्षेत्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में भी वन्यजीव सप्ताह के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला का समापन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह, जिला कलेक्टर कानाराम, उप वन संरक्षक सवाई माधोपुर सुनील, उप वन संरक्षक रणथम्भौर टाइगर रिजर्व प्रथम मानस सिंह, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित तथा दिनेश जांगिड़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

वन्यजीव सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों के लिए चित्रकला, निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी और अन्य जागरूकता संबंधी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति अपनी समझ एवं रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। समापन समारोह में प्रतियोगिताओं के विजेता और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों ने प्रशस्ति-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर अधिकारियों ने विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग का सहयोग आवश्यक है। विशेष रूप से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना भविष्य के संरक्षण प्रयासों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में रणथम्भौर की जैव विविधता, प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा में जनभागीदारी की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।

अधिकारियों ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक नागरिक बनें और वन्यजीवों की सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।
समारोह के अंत में प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले अधिकारियों, वनकर्मियों, शिक्षकों और अन्य सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।
प्रतियोगिताओं से आगे बढ़ा संरक्षण का संदेश, नई पीढ़ी की भागीदारी पर जोर
राजस्थान में वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इन कार्यक्रमों की विशेषता विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। जयपुर के जमवारामगढ़ क्षेत्र में करीब एक हजार विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ सरिस्का और सवाई माधोपुर में भी विभिन्न प्रतियोगिताओं तथा जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया गया।
चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सोच व्यक्त करने का अवसर मिला, वहीं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं ने वन्यजीवों और पर्यावरण के प्रति उनकी जानकारी बढ़ाने में भूमिका निभाई।
वन्यजीव सप्ताह के इन कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि जंगल और वन्यजीवों का भविष्य केवल संरक्षण योजनाओं पर नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता और आने वाली पीढ़ियों की भागीदारी पर भी निर्भर करता है।
वन अधिकारियों ने विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण, पौधारोपण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए इस संदेश को विद्यालयों से घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।




