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राजस्थान के संरक्षित क्षेत्रों को ₹144.43 करोड़ की सौगात, वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई रफ्तार

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में RPACS की बैठक में वर्ष 2026-27 की ₹144.43 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना मंजूर; आवास सुधार, ग्राम पुनर्वास, घासभूमि विकास, जल स्रोत, रैप्टर संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण पर रहेगा विशेष फोकस।

Nature Times Exclusive

जयपुर | 13 जुलाई 2026

 राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यानों, टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारण्यों और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण एवं प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सोमवार को महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित राजस्थान संरक्षित क्षेत्र संरक्षण समिति (RPACS) की सामान्य सभा की बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 144.43 करोड़ रुपये की वार्षिक बजट एवं कार्ययोजना को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से राज्य में जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव आवासों के विकास तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया कि स्वीकृत बजट का उपयोग संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीव आवास सुधार, स्वैच्छिक ग्राम पुनर्वास, घासभूमि विकास( ग्रास लैंड डेवलपमेंट ), प्राकृतिक जल स्रोतों का विकास, संरक्षण अवसंरचना को मजबूत करने, वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान, निगरानी व्यवस्था तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों पर किया जाएगा। इन योजनाओं का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीवों के लिए बेहतर और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना तथा संरक्षण प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाना है।

बैठक के दौरान सामान्य सभा ने वर्ष 2025-26 की वार्षिक कार्ययोजना की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की। समिति ने इस अवधि में 62.42 करोड़ रुपये के सफल व्यय पर संतोष व्यक्त करते हुए कार्यकारी समिति की अनुशंसाओं, वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंकेक्षित लेखों तथा ऑडिट प्रतिवेदन को भी सर्वसम्मति से अनुमोदित किया। इससे संरक्षण परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन और कार्यान्वयन की पारदर्शिता को भी बल मिला है।
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भविष्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इनमें रैप्टर (शिकारी पक्षियों) के संरक्षण, वन्यजीवों के लिए सालभर पेयजल उपलब्ध कराने, स्वैच्छिक ग्राम पुनर्वास कार्यक्रमों को गति देने तथा शिकार आधार (Prey Base) संवर्धन के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास अधिक समृद्ध होंगे और बाघ, तेंदुआ सहित अन्य प्रमुख प्रजातियों के संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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बैठक में संरक्षण प्रबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों एवं विषय विशेषज्ञों को समिति से जोड़ने का भी निर्णय लिया गया। इसके साथ ही वर्ष 2026 में राष्ट्रीय स्तर की वन्यजीव संरक्षण कार्यशाला आयोजित करने की घोषणा की गई, जिसमें देशभर के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, वन अधिकारी और संरक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेकर नवीन तकनीकों, अनुसंधान और संरक्षण रणनीतियों पर विचार-विमर्श करेंगे।
राजस्थान सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य के टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारण्य और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, आवास विकास और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 144.43 करोड़ रुपये की यह कार्ययोजना आने वाले वर्षों में राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को नई दिशा देने के साथ-साथ संरक्षण आधारित सतत विकास को भी मजबूती प्रदान करेगी।

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