
जयपुर | Nature Times Desk
जयपुर, 18 जून। राजस्थान में हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शासन सचिवालय के चिंतन सभागार में फ्रांस की विकास एजेंसी एएफडी के सहयोग से संचालित राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना की तीसरी उच्चाधिकार समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरे करना नहीं, बल्कि ऐसे परिणाम देना है जो जमीन पर साफ दिखाई दें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक कार्य का सकारात्मक प्रभाव स्थानीय समुदाय, पर्यावरण, जल संसाधनों और जैव विविधता पर स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से ऐसे मॉडल विकसित किए जाएं जो हरित आवरण बढ़ाने, भूजल स्तर सुधारने, वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने और ग्रामीण आजीविका को बेहतर बनाने में उदाहरण बन सकें।
मुख्य सचिव ने परियोजना से जुड़े हितग्राहकों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं, अनुभवों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जाएं ताकि विकास कार्यों का लाभ सीधे आमजन तक पहुंच सके।
बैठक में परियोजना के तहत किए जा रहे सभी कार्यों को निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता मापदंडों के अनुरूप पूरा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही नियमित मॉनिटरिंग, प्रभावी निरीक्षण और समयबद्ध क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही गई। मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के परिणामों को मापने के लिए परिवर्तन के स्पष्ट सूचकांक निर्धारित किए जाएं, जिससे परियोजना की शुरुआत और वर्तमान स्थिति की तुलनात्मक समीक्षा कर वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके।

वृक्षारोपण और चारागाह विकास कार्यों में स्थानीय एवं क्षेत्र विशेष के अनुकूल प्रजातियों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए। उच्च घनत्व वाले हरित क्षेत्र विकसित करने, बड़े आकार के पौधों के रोपण तथा उन्नत नर्सरियों के विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। उनका मानना था कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पौधारोपण ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।
जल संरक्षण को परियोजना का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि जल संरक्षण संरचनाओं का विकास इस प्रकार किया जाए जिससे भूजल स्तर में वास्तविक सुधार हो और स्थानीय जल स्रोतों का पुनर्भरण मजबूत हो सके। उन्होंने मृदा एवं जल संरक्षण गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों के नियमित मूल्यांकन की भी आवश्यकता जताई।
बैठक में फ्रांसीसी विकास एजेंसी एएफडी की दूसरी ऋण किश्त से संबंधित अनुबंध प्रक्रिया को जुलाई 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को परिणामोन्मुखी तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ यदि परियोजना को प्रभावी रूप से लागू किया गया तो यह न केवल राजस्थान के वन और जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा देगी, बल्कि विकसित राजस्थान के लक्ष्य को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वन विभाग आनंद कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) अरिजीत बनर्जी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास शिखा मेहरा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद, परियोजना निदेशक राजेश गुप्ता सहित वित्त, कृषि, पर्यटन, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



