राजस्थान में बढ़ी चीता गतिविधियां: रणथंभौर से KAP12, झालावाड़-राजगढ़ सीमा से KAP13 का रेस्क्यू
6 मई 2026 को राजगढ़-झालावाड़ सीमा क्षेत्र से KAP13 और 8 मई 2026 को रणथंभौर टाइगर रिजर्व की फलोदी रेंज से KAP12 का सफल रेस्क्यू किया गया। वहीं 7 मई को धौलपुर के सरमथुरा क्षेत्र में KGP3 चीता दिखाई दिया।

8 मई 2026
नेचर टाइम्स डेस्क,
जयपुर। राजस्थान के जंगल इन दिनों देश की सबसे चर्चित वन्यजीव गतिविधियों में शामिल चीता मूवमेंट के कारण राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में बने हुए हैं। मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच रहे अफ्रीकी चीतों ने वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। पिछले तीन दिनों में राजस्थान के विभिन्न जिलों में सामने आई चीता गतिविधियों ने यह साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में राजस्थान मध्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव मूवमेंट कॉरिडोर के रूप में उभर सकता है। लगातार बदलती लोकेशन, जंगलों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों तक चीतों की पहुंच और फिर सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन ने वन विभाग की चुनौती को और अधिक बढ़ा दिया है।

घटनाक्रम की शुरुआत 6 मई 2026 को हुई, जब मध्यप्रदेश की कुनो टीम द्वारा नर चीता KAP13 को राजगढ़ और झालावाड़ जिले की सीमा क्षेत्र से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। वन विभाग के अनुसार चीते की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी और विशेषज्ञ टीम उसकी लोकेशन को लगातार ट्रैक कर रही थी। इसके बाद वन विभाग, चिकित्सकों और तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। पूरे अभियान के दौरान यह विशेष ध्यान रखा गया कि चीते को किसी प्रकार का तनाव या चोट न पहुंचे। सफल रेस्क्यू के बाद चीते को सुरक्षित तरीके से वापस मध्यप्रदेश स्थित कुनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया और पुनः जंगल में छोड़ दिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के ऑपरेशन बेहद संवेदनशील माने जाते हैं क्योंकि चीता अत्यंत तेज गति और सतर्क स्वभाव वाला वन्यजीव होता है। ऐसे में हर कदम विशेषज्ञों की निगरानी में उठाया जाता है। ट्रेंकुलाइजेशन से लेकर ट्रांसपोर्ट और पुनः रिलीज तक पूरे अभियान में वैज्ञानिक प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। KAP13 के सफल रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीमों को लगा कि स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन अगले ही दिन राजस्थान के धौलपुर जिले से आई खबर ने वन विभाग को फिर अलर्ट मोड पर ला दिया।
7 मई 2026 को धौलपुर जिले के सरमथुरा क्षेत्र के जंगलों में नर चीता KGP3 की मौजूदगी सामने आई। ग्रामीणों और वन विभाग की टीमों द्वारा चीते की तस्वीरें और मूवमेंट देखे जाने के बाद पूरे इलाके में हलचल बढ़ गई। वन विभाग ने तुरंत ट्रैकिंग और निगरानी अभियान तेज कर दिया। अधिकारियों के अनुसार चीता करौली के डांग क्षेत्र से होते हुए यूपी सीमा के रास्ते धौलपुर क्षेत्र तक पहुंचा था। इसके बाद वन विभाग की टीमें लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं।

धौलपुर क्षेत्र में चीते की मौजूदगी की सूचना मिलते ही डीएफओ बी. चेतन कुमार, एसीएफ चेतराम मीणा और रेंजर देवेंद्र चौहान सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को जंगल क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी गई। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी चीते की गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत सूचना दें और किसी भी प्रकार से उसके करीब जाने या पीछा करने की कोशिश न करें। वन विभाग के अनुसार प्राथमिकता वन्यजीव और मानव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इसी बीच 8 मई 2026 को राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक और बड़ा ऑपरेशन किया गया।
मध्यप्रदेश की कुनो टीम द्वारा रणथंभौर टाइगर रिजर्व की फलोदी रेंज स्थित काला कुआं क्षेत्र से नर चीता KAP12 को सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किया गया। वन विभाग के अनुसार चीते की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी और उसकी गतिविधियों पर विशेषज्ञ टीम लगातार नजर बनाए हुए थी। इसके बाद अनुभवी चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से ट्रेंकुलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी की गई।
पूरी कार्यवाही निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार सम्पन्न हुई और इसके बाद चीते को सुरक्षित तरीके से पुनः मध्यप्रदेश ले जाया गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान यह विशेष ध्यान रखा गया कि चीते को किसी प्रकार का शारीरिक नुकसान न पहुंचे। इसके लिए आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की सहायता ली गई। ऑपरेशन पूरा होने के बाद चीते को विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ कुनो नेशनल पार्क के लिए रवाना किया गया।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण और इंटर-स्टेट वन्यजीव कॉरिडोर को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान तक पहुंच रहे ये चीते केवल सामान्य मूवमेंट नहीं बल्कि भविष्य के बड़े प्राकृतिक कॉरिडोर की संभावनाओं का संकेत हैं। धौलपुर, करौली, रणथंभौर, झालावाड़ और आसपास के वन क्षेत्र अब चीता मूवमेंट के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार अफ्रीकी चीते विशाल क्षेत्र में भ्रमण करने वाले जीव होते हैं और नए क्षेत्रों की तलाश में कई सौ किलोमीटर तक का सफर तय कर सकते हैं। यही कारण है कि अब वन विभाग आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम, रेडियो कॉलर मॉनिटरिंग, हाई-लेवल रेस्क्यू प्रोटोकॉल और इंटर-स्टेट समन्वय पर विशेष ध्यान दे रहा है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि भविष्य में राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच वन्यजीव कॉरिडोर को और अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया गया तो भारत में चीता पुनर्स्थापना परियोजना को नई मजबूती मिल सकती है।
फिलहाल राजस्थान में लगातार बढ़ रही चीता गतिविधियों ने वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफर्स और संरक्षण विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। टाइगर रिजर्व, लेपर्ड कॉरिडोर और अब चीतों की सक्रिय मौजूदगी ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि राजस्थान का वन्यजीव परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। वन विभाग की टीमें लगातार अलर्ट मोड पर हैं और हर चीता मूवमेंट पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की किसी भी संभावना को समय रहते रोका जा सके।




