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तपते रेगिस्तान में राहत: डेजर्ट नेशनल पार्क में 75 जल स्रोतों से वन्यजीवों को जीवनदान

गोडावण सहित दुर्लभ प्रजातियों को बचाने के लिए वन विभाग की दिन-रात मेहनत

जैसलमेर: 28 April 2026

नेचर टाइम्स डेस्क,

 राजस्थान में सूरज के तीखे तेवरों ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। जैसलमेर के प्रसिद्ध डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) में तापमान के तेजी से बढ़ते ग्राफ को देखते हुए वन विभाग ने वन्यजीवों को भीषण गर्मी और जल संकट से बचाने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

पार्क प्रबंधन ने वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए पूरे संरक्षित क्षेत्र में करीब 75 रणनीतिक स्थानों को चिह्नित कर वहां विशेष बंदोबस्त किए हैं। वर्तमान में 60 से अधिक कृत्रिम और प्राकृतिक जल स्रोतों को नियमित रूप से भरा जा रहा है। इनमें आधुनिक गजलर (Guzzlers), पारंपरिक तालाब और कंक्रीट के टैंक शामिल हैं, ताकि हिरण, लोमड़ी और चिंकारा जैसे मरुस्थलीय जीवों को पानी के लिए भटकना न पड़े।

इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी गश्ती दल (Patrolling Teams) हैं। भीषण गर्मी में भी ये दल ऊंटों और वाहनों के जरिए सूखे पड़े जल स्रोतों तक पानी पहुंचा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी कवायद का एक बड़ा उद्देश्य इंसान-जानवर संघर्ष को रोकना भी है। दरअसल, पानी की तलाश में अक्सर वन्यजीव संरक्षित सीमा लांघकर रिहायशी इलाकों की ओर रुख करते हैं, जहां उनके शिकार होने या सड़क हादसों की आशंका बढ़ जाती है।

विशेष रूप से, विलुप्तप्राय ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (गोडावण) के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजस्थान के इस राज्य पक्षी को भीषण लू और निर्जलीकरण से बचाने के लिए जल स्रोतों के पास छायादार और नमी वाले क्षेत्रों का प्रबंधन किया जा रहा है। वन विभाग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पारा चाहे कितना भी चढ़े, पार्क के भीतर पानी की कमी से किसी भी बेजुबान की जान न जाए। स्थानीय प्रशासन और वनरक्षक चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं ताकि इस पारिस्थितिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

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