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एनसीआर और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु प्रदूषण पर कड़ा मंथन, जयपुर में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक सीएक्यूएम अध्यक्ष ने दी सख्त दिशा, अलवर–भरतपुर–भिवाड़ी के लिए तय हुआ स्पष्ट रोडमैप

दो साल में बदलेगा एनसीआर का चेहरा, सड़कों पर हरित पट्टी और पैविंग अनिवार्य

सुमित जुनेजा,

जयपुर, 27 जनवरी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक अहम और निर्णायक पहल के तहत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल मुख्यालय, जयपुर में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों और आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने वायु प्रदूषण नियंत्रण, प्रबंधन और दीर्घकालिक पर्यावरणीय उपायों पर विस्तृत और गंभीर चर्चा की।

बैठक को संबोधित करते हुए राजेश वर्मा ने स्पष्ट कहा कि एनसीआर राजस्थान के अंतर्गत आने वाले अलवर, भरतपुर और भिवाड़ी क्षेत्रों के लिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए ठोस और परिणामोन्मुखी कार्ययोजना बनाना अनिवार्य है। उन्होंने मीयावाकी तकनीक से बड़े पैमाने पर पौधारोपण, सार्वजनिक परिवहन के अधिकतम उपयोग और सफाई कार्यों में आधुनिक तकनीक अपनाने पर विशेष जोर दिया। साथ ही, अलवर, भरतपुर और भिवाड़ी के वार्षिक सिटी एक्शन प्लान की समीक्षा करते हुए उद्योगों में ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइसेस की स्थापना को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए, ताकि औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी निगरानी और मानकों का सख्त पालन सुनिश्चित हो सके।

सीएक्यूएम अध्यक्ष ने सड़कों से उठने वाली धूल को प्रदूषण का बड़ा कारण बताते हुए निर्देश दिए कि आगामी दो वर्षों में संपूर्ण सड़क चौड़ाई पर पैविंग और हरित पट्टी का निर्माण किया जाए। उन्होंने सड़कों पर अवैध पार्किंग करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, अरावली क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधारोपण और सभी संबंधित हितधारकों के साथ निरंतर जन-जागरूकता एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने पर भी बल दिया।

भविष्य की जरूरतों को रेखांकित करते हुए बैठक में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। राजेश वर्मा ने कहा कि अधिक चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध होने से आमजन इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित होगा। उन्होंने ई-वाहनों में प्रयुक्त बैटरियों की रिसाइक्लिंग व्यवस्था को मजबूत करने तथा सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के स्पष्ट निर्देश दिए।

परिवहन और यातायात प्रबंधन पर चर्चा के दौरान उन्होंने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों की पहचान, जब्ती और स्क्रैपिंग की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं को शीघ्र क्लीन मोबिलिटी अपनाने, एनसीआर क्षेत्रों में डीजल ऑटो रिक्शा को 31 दिसंबर 2026 तक चरणबद्ध रूप से हटाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करने पर जोर दिया। यातायात सुधार के लिए इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, एएनपीआर कैमरों की स्थापना, ट्रैफिक कंजेशन प्वाइंट्स की पहचान और पार्किंग सुविधाओं के विस्तार पर भी गहन विमर्श हुआ।

बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सी एंड डी वेस्ट को लेकर भी व्यापक समीक्षा की गई। शहरी स्थानीय निकाय विभाग और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के साथ लिगेसी वेस्ट, डंप साइट्स और दैनिक कचरे के निस्तारण की प्रगति पर चर्चा हुई। सीएक्यूएम अध्यक्ष ने निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले अपशिष्ट को अन्य निर्माण परियोजनाओं में उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि अपशिष्ट पुनर्चक्रण को व्यवहार में लाया जा सके।

प्रदूषण के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए राजेश वर्मा ने राज्य स्तर पर एक विशेष टास्क फोर्स के गठन के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, उद्योगों, डीजल जनरेटर सेट और सी एंड डी साइट्स के औचक निरीक्षण को अनिवार्य बताया।

इस उच्चस्तरीय बैठक में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष आलोक गुप्ता, सीएक्यूएम के सदस्य सचिव (तकनीकी) विरेंद्र शर्मा, सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड़े सहित स्थानीय स्वशासन, उद्योग, रीको, कृषि, परिवहन, वन एवं पर्यावरण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, भिवाड़ी एकीकृत विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा अलवर, भरतपुर और भिवाड़ी के नगर आयुक्त मौजूद रहे।

जयपुर में हुई यह समीक्षा बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत बनी कि एनसीआर और उसके आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि सख्त फैसलों और समयबद्ध कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है।

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