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गणतंत्र दिवस पर वन विभाग में गौरवपूर्ण संयोग, पिता–पुत्र की जोड़ी एक साथ सम्मानित 77वें गणतंत्र दिवस पर राजस्थान वन विभाग ने रचा प्रेरणा का इतिहास

प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय और मुख्य वन संरक्षक आर.के. खेरवा ने प्रदान किए प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह

सुमित जुनेजा,

जयपुर। 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर राजस्थान वन विभाग में इस बार एक ऐसा प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण संयोग देखने को मिला, जिसने पूरे विभाग को गर्व से भर दिया। एक ही विभाग में कार्यरत पिता और पुत्र को उनके उत्कृष्ट, निष्ठावान एवं उल्लेखनीय कार्यों के लिए अलग-अलग स्तरों पर सम्मानित किया गया, जो न केवल प्रशासनिक सेवा की मिसाल है बल्कि नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का संदेश है।

राज्य स्तर पर वन विभाग में कार्यरत वरिष्ठ निजी सचिव अशोक कुमार शर्मा को उनके दीर्घकालिक, अनुकरणीय एवं उत्कृष्ट कार्यों के लिए पवन कुमार उपाध्याय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख), राजस्थान द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और विभागीय कार्यों में उत्कृष्ट योगदान की औपचारिक स्वीकृति रहा।

वहीं दूसरी ओर, उनके पुत्र मनमोहन शर्मा, जो सहायक लेखा अधिकारी के पद पर उप वन संरक्षक कार्यालय, जयपुर (उत्तर) में कार्यरत हैं, को संभाग स्तर पर उनके सराहनीय कार्यों के लिए आर के खेरवा, मुख्य वन संरक्षक, संभाग जयपुर द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। पिता–पुत्र दोनों का एक ही दिन सम्मानित होना वन विभाग के इतिहास में एक यादगार और प्रेरक क्षण बन गया।

यह गरिमामय समारोह 26 जनवरी 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजस्थान वन विभाग के मुख्यालय अरण्य भवन में आयोजित किया गया, जहां 2019 के बाद पहली बार बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में वन विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और अधिकारीगण उपस्थित रहे, जिससे आयोजन की गरिमा और महत्व और भी बढ़ गया।
इस अवसर पर गणतंत्र के मूल्यों—कर्तव्य, अनुशासन और सेवा—की भावना पूरे आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। यह संयोग इस बात का प्रतीक बना कि राजस्थान वन विभाग केवल जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा ही नहीं करता, बल्कि समर्पित सेवा, पारिवारिक मूल्यों और प्रशासनिक उत्कृष्टता की परंपरा को भी आगे बढ़ाता है।
77वें गणतंत्र दिवस पर अरण्य भवन से उठी यह तस्वीर केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि एक संदेश थी—
सेवा पीढ़ियों तक चलती है, जब समर्पण विरासत बन जाता है।

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