देशपर्यावरणराजस्थान
Trending

राजस्थान में प्रदूषण पर सुप्रीम सख्त, तीन जिलों में बनेंगे विशेष पर्यावरण न्यायालय

जोजरी नदी मामले में बड़ा फैसला, अवैध डिस्चार्ज पर तुरंत कार्रवाई और पर्यावरण बहाली का आदेश

जयपुर, 10 अप्रैल 2026

नेचर टाइम्स डेस्क,

राजस्थान में नदियों के लगातार बिगड़ते हालात और बढ़ते प्रदूषण पर अब देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपना लिया है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने एक अहम आदेश जारी करते हुए जोधपुर, पाली और बालोतरा में विशेष पर्यावरण न्यायालय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रदूषण से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा हो सके और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई हो।
यह फैसला उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें जोजरी नदी में फैलते प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। अदालत ने साफ कहा कि स्वच्छ पानी और प्रदूषण मुक्त वातावरण हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से सीधे जुड़ा हुआ है। अब इस अधिकार से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

फाइल फोटो

इस पूरे मामले में बड़ा मोड़ तब आया, जब हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट सामने आई। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में बनी इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाली सच्चाई उजागर की। जांच में सामने आया कि कई उद्योग बिना किसी शोधन के जहरीले रसायन और गंदा पानी सीधे नदियों में छोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रदूषण को छिपाने के लिए नदी के दूषित हिस्सों को मिट्टी से ढकने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं।
रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी को भी उजागर किया। राजस्थान स्टेट पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और RIICO जैसी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम साबित हुईं। कई कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ निर्देश दिए हैं कि नदियों में गंदा पानी डालने वाले सभी अवैध रास्तों को तुरंत बंद किया जाए। साथ ही एक विशेष ‘पर्यावरण बहाली और मुआवजा कोष’ बनाने के लिए कहा गया है, जिससे प्रभावित इलाकों को फिर से जीवित किया जा सके। जोजरी नदी के प्राकृतिक बहाव को बहाल करने और उसके किनारों से अतिक्रमण हटाने के लिए भी सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि अब निगरानी के पुराने तरीके नहीं चलेंगे। आधुनिक तकनीक के जरिए अपशिष्ट जल की लगातार निगरानी की जाए और ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह साफ संकेत है कि अब सिर्फ नियम बनाने से काम नहीं चलेगा, उनका जमीन पर असर भी दिखना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम में उद्योगों की जवाबदेही भी तय की गई है। HPCL राजस्थान रिफायनरी लिमिटेड को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने CSR फंड के जरिए जल शोधन और पर्यावरण सुधार से जुड़े ढांचे को मजबूत करे।
सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई केवल एक आदेश नहीं, बल्कि एक सख्त संदेश है—अब पर्यावरण के साथ लापरवाही करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। राजस्थान में यह फैसला आने वाले समय में नदियों के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!