पर्यावरणराजस्थान
Trending

द्रव्यवती पर सख्ती: 40 किमी में प्रदूषण का खुलासा, अब सुधार की बड़ी तैयारी

सीएम के निर्देश के बाद एक्शन—बिना ट्रीटमेंट सीवर पकड़ा गया, एलिवेटेड रोड और इको-टूरिज्म प्लान फिर चर्चा में

जयपुर, 3 अप्रैल 2026

 नेचर टाइम्स, डेस्क, 

राजधानी की जीवनरेखा मानी जाने वाली द्रव्यवती नदी एक बार फिर गंभीर संकट के केंद्र में है। लंबे समय से गंदगी और लापरवाही का बोझ झेल रही इस नदी को लेकर अब प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की नाराजगी के बाद हालात अचानक बदलते नजर आ रहे हैं—मैदान में अधिकारी, मौके पर निरीक्षण और सुधार के सख्त संकेत।


मुख्यमंत्री द्वारा प्रदूषण पर जताई गई चिंता के तुरंत बाद जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम ने नदी के पूरे बहाव क्षेत्र की व्यापक जांच शुरू की। लगभग 40 किलोमीटर लंबे हिस्से का ग्राउंड निरीक्षण किया गया, जिसमें कई ऐसे पॉइंट चिन्हित हुए जहां से लगातार गंदगी और सीवर सीधे नदी में गिर रहा है। मौके पर ही अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार कर जिम्मेदार एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच के दौरान जो तस्वीर सामने आई, वह बेहद चिंताजनक है। कई स्थानों पर बिना किसी ट्रीटमेंट के सीवर का गंदा पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। जिस प्रोजेक्ट के तहत अमानीशाह नाले को विकसित कर द्रव्यवती नदी के रूप में बदला गया था, वही आज फिर से प्रदूषण के शिकंजे में फंसता दिखाई दे रहा है। नदी के किनारे रहने वाले लोग बदबू, गंदगी और बढ़ते स्वास्थ्य खतरों से परेशान हैं। स्थानीय स्तर पर बीमारियों की आशंका भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।


इसी बीच द्रव्यवती के ऊपर प्रस्तावित चार एलिवेटेड पुलों की योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है तो जयपुर की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। शहर के अलग-अलग हिस्सों को सीधे जोड़ने वाले ये एलिवेटेड कॉरिडोर रोजाना के जाम से राहत दिला सकते हैं और शहरी कनेक्टिविटी को नई दिशा दे सकते हैं। करीब ₹1400 करोड़ की लागत से तैयार यह महत्वाकांक्षी परियोजना पहले भी जयपुर के शहरी विकास का बड़ा प्रतीक मानी गई थी, लेकिन समय के साथ इसकी चमक फीकी पड़ गई। अब प्रशासन इसे फिर से जीवित करने के प्रयास में जुट गया है। लक्ष्य साफ है—द्रव्यवती को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाकर एक आधुनिक और टिकाऊ मॉडल के रूप में विकसित करना।


योजना के तहत अब नदी को केवल जल निकासी का माध्यम नहीं, बल्कि एक इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की तैयारी भी जोर पकड़ रही है। यदि सफाई, हरित विकास और बेहतर प्रबंधन को जमीन पर उतारा गया, तो द्रव्यवती न सिर्फ पर्यावरण सुधार का उदाहरण बनेगी, बल्कि जयपुर के पर्यटन मानचित्र पर भी एक नया आकर्षण केंद्र बन सकती है। इससे स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या यह सख्ती स्थायी बदलाव में बदलेगी या फिर द्रव्यवती एक बार फिर योजनाओं और दावों के बीच खो जाएगी? फिलहाल, प्रशासन की सक्रियता ने उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन असली परीक्षा अब जमीन पर नजर आने वाले परिणामों की होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!