CAMPA फंड के तहत वानिकी कार्यों पर बड़ा फोकस, लेकिन परिणामों की स्पष्ट तस्वीर अब भी अधूरी
व्यापक योजनाओं के बावजूद outcome-based assessment और पारदर्शी डेटा की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण

ο सुमित जुनेजा ο
राजस्थान में CAMPA फंड के तहत बड़े स्तर पर वानिकी विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें पौधारोपण, जल संरक्षण संरचनाएं, जैव विविधता सुधार और वन्यजीव आवास विकास जैसे कई घटक शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इन कार्यों पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जा रहा है। लेकिन इन प्रयासों की वास्तविक सफलता का आकलन केवल कार्यों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके परिणामों से किया जाता है।

वन विकास के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण मापदंड पौधों की जीवित रहने की दर (Survival Rate) को माना जाता है। उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों में पौधारोपण की संख्या तो स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए पौधों का वास्तविक survival rate कितना है, इस पर विस्तृत और समेकित जानकारी सीमित रूप से उपलब्ध है। यह एक ऐसा पहलू है जो सीधे तौर पर वन विकास की गुणवत्ता को निर्धारित करता है। इसी प्रकार CAMPA के तहत बनाए गए जल संरक्षण ढांचे — जैसे चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, गैबियन संरचनाएं और परकोलेशन टैंक — का दीर्घकालिक प्रभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इन संरचनाओं का निर्माण बड़े स्तर पर किया गया है, लेकिन इनकी संचालन स्थिति, रखरखाव (maintenance) और उपयोगिता को लेकर नियमित सार्वजनिक डेटा सीमित दिखाई देता है। यह जानना जरूरी है कि क्या ये संरचनाएं लंबे समय तक प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं और क्या इनसे वन क्षेत्रों में नमी और जल उपलब्धता वास्तव में बढ़ रही है।

CAMPA फंड का एक प्रमुख उद्देश्य compensatory afforestation के माध्यम से उन वन क्षेत्रों की भरपाई करना है जो विकास परियोजनाओं के कारण प्रभावित हुए हैं। ऐसे में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि लगाए गए पौधे क्या वास्तव में उस स्तर के जंगल विकसित कर पा रहे हैं, जो मूल वन क्षेत्रों के पारिस्थितिक संतुलन के बराबर हो सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल संख्या के आधार पर तुलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जैव विविधता, प्रजातियों की विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता को भी समान महत्व देना आवश्यक है।

वन विकास कार्यक्रमों में सामुदायिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत livelihood improvement, skill development और community mobilization के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, यह भी देखना आवश्यक है कि इन कार्यक्रमों का लाभ कितनी व्यापकता से स्थानीय समुदायों तक पहुंच रहा है और क्या वे वास्तव में वन संरक्षण प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बन पा रहे हैं।
उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि CAMPA के तहत राज्य में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं और संसाधनों की कोई कमी नहीं है। लेकिन इन कार्यों की प्रभावशीलता को समझने के लिए नियमित मॉनिटरिंग, पारदर्शी डेटा और परिणाम आधारित मूल्यांकन (Outcome-based assessment) की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह सवाल प्रमुखता से उभरता है कि क्या CAMPA फंड के तहत किए जा रहे ये कार्य केवल प्रक्रिया तक सीमित हैं या वास्तव में उनके परिणाम भी उतनी ही मजबूती से सामने आ रहे हैं। आने वाले समय में इन कार्यों की सफलता इस बात से तय होगी कि वे कितनी स्थायित्व के साथ वन क्षेत्र, जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत कर पाते हैं।राजस्थान में CAMPA फंड के तहत बड़े स्तर पर वानिकी विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें पौधारोपण, जल संरक्षण संरचनाएं, जैव विविधता सुधार और वन्यजीव आवास विकास जैसे कई घटक शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इन कार्यों पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जा रहा है। लेकिन इन प्रयासों की वास्तविक सफलता का आकलन केवल कार्यों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके परिणामों से किया जाता है।

वन विकास के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण मापदंड पौधों की जीवित रहने की दर (Survival Rate) को माना जाता है। उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों में पौधारोपण की संख्या तो स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए पौधों का वास्तविक survival rate कितना है, इस पर विस्तृत और समेकित जानकारी सीमित रूप से उपलब्ध है। यह एक ऐसा पहलू है जो सीधे तौर पर वन विकास की गुणवत्ता को निर्धारित करता है। इसी प्रकार CAMPA के तहत बनाए गए जल संरक्षण ढांचे — जैसे चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, गैबियन संरचनाएं और परकोलेशन टैंक — का दीर्घकालिक प्रभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इन संरचनाओं का निर्माण बड़े स्तर पर किया गया है, लेकिन इनकी संचालन स्थिति, रखरखाव (maintenance) और उपयोगिता को लेकर नियमित सार्वजनिक डेटा सीमित दिखाई देता है। यह जानना जरूरी है कि क्या ये संरचनाएं लंबे समय तक प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं और क्या इनसे वन क्षेत्रों में नमी और जल उपलब्धता वास्तव में बढ़ रही है।

CAMPA फंड का एक प्रमुख उद्देश्य compensatory afforestation के माध्यम से उन वन क्षेत्रों की भरपाई करना है जो विकास परियोजनाओं के कारण प्रभावित हुए हैं। ऐसे में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि लगाए गए पौधे क्या वास्तव में उस स्तर के जंगल विकसित कर पा रहे हैं, जो मूल वन क्षेत्रों के पारिस्थितिक संतुलन के बराबर हो सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल संख्या के आधार पर तुलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जैव विविधता, प्रजातियों की विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता को भी समान महत्व देना आवश्यक है।
वन विकास कार्यक्रमों में सामुदायिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत livelihood improvement, skill development और community mobilization के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, यह भी देखना आवश्यक है कि इन कार्यक्रमों का लाभ कितनी व्यापकता से स्थानीय समुदायों तक पहुंच रहा है और क्या वे वास्तव में वन संरक्षण प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बन पा रहे हैं।
उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि CAMPA के तहत राज्य में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं और संसाधनों की कोई कमी नहीं है। लेकिन इन कार्यों की प्रभावशीलता को समझने के लिए नियमित मॉनिटरिंग, पारदर्शी डेटा और परिणाम आधारित मूल्यांकन (Outcome-based assessment) की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह सवाल प्रमुखता से उभरता है कि क्या CAMPA फंड के तहत किए जा रहे ये कार्य केवल प्रक्रिया तक सीमित हैं या वास्तव में उनके परिणाम भी उतनी ही मजबूती से सामने आ रहे हैं। आने वाले समय में इन कार्यों की सफलता इस बात से तय होगी कि वे कितनी स्थायित्व के साथ वन क्षेत्र, जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत कर पाते हैं।




