
सुमित जुनेजा
राजसमंद। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाकर राष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुकी राजस्थान के राजसमंद जिले की पिपलांत्री ग्राम पंचायत अब एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर बढ़ रही है। पिपलांत्री देश की पहली ऐसी ग्राम पंचायत बनने जा रही है जो कार्बन क्रेडिट के माध्यम से नियमित आय अर्जित करेगी। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नई मिसाल स्थापित करेगी।

इस दिशा में ग्रीन पीपल सोसाइटी, टेरा ब्लू कंपनी और पिपलांत्री ग्राम पंचायत के बीच औपचारिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ग्राम पंचायत प्रशासक अनिता पालीवाल की अध्यक्षता में आयोजित ग्राम सभा में ग्रामीणों को विस्तार से बताया गया कि किस प्रकार जैविक खेती, व्यापक वृक्षारोपण और सोलर रूफ इंस्टॉलेशन के माध्यम से कार्बन क्रेडिट अर्जित किए जा सकते हैं। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
ग्रीन पीपल सोसाइटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किए गए वृक्षारोपण से होने वाला कार्बन क्रेडिट लाभ सीधे ग्राम पंचायत को प्राप्त होगा, जबकि निजी भूमि पर वृक्षारोपण करने वाले किसानों को आय सीधे उनके खाते में जाएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आमदनी में भी स्थायी वृद्धि होगी।

टेरा ब्लू के संस्थापक उदय मोटवानी और प्रदीप मोटवानी ने पिपलांत्री के वर्षों से चल रहे पर्यावरणीय प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणा बनेगा। टेरा ब्लू के सीईओ ने जानकारी दी कि पिछले चार वर्षों में लगाए गए पौधों के आधार पर आगामी 25 वर्षों तक अतिरिक्त आय प्राप्त होती रहेगी, जिससे पंचायत को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता मिलेगी।
पिपलांत्री के पर्यावरणीय अभियान के प्रणेता श्याम सुंदर पालीवाल ने बताया कि वर्षों के सतत वृक्षारोपण से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, नमी संरक्षण बढ़ा है, भूजल स्तर सुदृढ़ हुआ है और फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अब कार्बन क्रेडिट के रूप में मिलने वाली आय इस प्रयास को नई गति देगी।

पिपलांत्री का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का भी सशक्त माध्यम बन सकता है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो देशभर की ग्राम पंचायतों के लिए यह एक क्रांतिकारी उदाहरण साबित होगा—जहां हर पौधा केवल हरियाली ही नहीं, बल्कि आय और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक

