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तिरंगे की शान और जंगल की पहचान, जयपुर चिड़ियाघर बना गणतंत्र दिवस का प्रतीक

एसीएफ प्राची चौधरी ने कहा—वन्यजीव संरक्षण भी राष्ट्रसेवा का सशक्त माध्यम

सुमित जुनेजा,

जयपुर: 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर जयपुर चिड़ियाघर देशभक्ति, अनुशासन और समर्पण का जीवंत प्रतीक बन गया। वन्यजीवों के बीmच तिरंगे की शान लहराई और पूरे परिसर में राष्ट्रगान की गूँज ने माहौल को गर्व और भावुकता से भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि उप वन संरक्षक (DCF) विजयपाल सिंह द्वारा भव्य ध्वजारोहण के साथ हुई। जैसे ही तिरंगा फहराया गया, अधिकारियों, कर्मचारियों और स्टाफ ने एक स्वर में राष्ट्रगान गाकर गणतंत्र के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की।

इस गरिमामय समारोह में सहायक वन संरक्षक (ACF) प्राची चौधरी ने उपस्थित स्टाफ को संबोधित करते हुए कहा कि गणतंत्र केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और कर्तव्य का संकल्प है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण को राष्ट्रसेवा का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि जंगल, वन्यजीव और प्रकृति की रक्षा करना भी देश की रक्षा के समान है। उनके प्रेरणादायी शब्दों ने पूरे स्टाफ में नई ऊर्जा और गर्व की भावना भर दी।

कार्यक्रम में रेंज ऑफिसर जितेन्द्र चौधरी और वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अशोक तंवर की विशेष उपस्थिति रही। चिड़ियाघर के समस्त तकनीकी स्टाफ, फील्ड कर्मियों और कर्मचारियों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और एकजुटता के साथ समारोह में भाग लिया। हर चेहरा राष्ट्रभक्ति के भाव से दमक रहा था और हर स्वर में देश के प्रति समर्पण झलक रहा था।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संदेश था कि वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और राष्ट्रनिर्माण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जयपुर चिड़ियाघर ने यह साबित कर दिया कि जंगलों की रक्षा करने वाले ही असल में देश की नींव को मजबूत करते हैं।

गणतंत्र दिवस पर जयपुर चिड़ियाघर से उठी यह राष्ट्रभक्ति की आवाज न सिर्फ एक समारोह थी, बल्कि एक संकल्प था—
देश के लिए, प्रकृति के लिए और भविष्य की पीढ़ियों के लिए।
तिरंगे की शान, राष्ट्रगान की गूँज और वन्यजीवों की शांति के बीच मनाया गया यह गणतंत्र दिवस जयपुर के इतिहास में एक प्रेरणादायी अध्याय बन गया।

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