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राजस्थान में प्रदूषण नियंत्रण का नया मॉडल: ETS पर बड़ा कदम, उद्योग और पर्यावरण साथ

प्रदूषण पर अब बाजार आधारित नियंत्रण: आरएसपीसीबी की निर्णायक पहल

सुमित जुनेजा,

राजस्थान में प्रदूषण नियंत्रण की नई रूपरेखा

रएसपीसीबी की ETS कार्यशाला से साफ संदेश: उद्योग और पर्यावरण अब टकराव नहीं, समन्वय से आगे बढ़ेंगे

19 जनवरी को राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई, जब राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (Rajasthan State Pollution Control Board) द्वारा एमिशन ट्रेडिंग स्कीम (ETS) पर एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन जयपुर में किया गया। यह कार्यशाला राज्य के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा एमिशन मार्केट एक्सीलरेटर—एपिक इंडिया और जे-पाल की संयुक्त पहल—के सहयोग से होटल मैरियट में संपन्न हुई।

यह कार्यशाला मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma की बजट घोषणा के क्रम में आयोजित की गई, जिसमें राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए, व्यावहारिक और बाजार-आधारित मॉडल अपनाने की दिशा तय की गई थी। कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की क्षमता संवर्धन, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ETS के अनुकूलन और साझा सहयोग को मजबूत करना रहा।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए आरएसपीसीबी के अध्यक्ष आलोक गुप्ता ने कहा कि एमिशन ट्रेडिंग स्कीम अब समय की आवश्यकता बन चुकी है और भविष्य में इसे सभी हितधारकों के सहयोग से लागू करना ही होगा। उन्होंने बताया कि ETS लंबे समय से विकसित देशों में प्रभावी रूप से लागू है और भारत में गुजरात पहला राज्य है, जहां इसे सफलतापूर्वक अपनाया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान में शीघ्र ही सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) के लिए एमिशन ट्रेडिंग शुरू करने की तैयारी है। यह कार्यशाला औद्योगिक संगठनों के साथ आयोजित होने वाली कार्यशालाओं की श्रृंखला की पहली कड़ी रही।

इस अवसर पर आरएसपीसीबी के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में एमिशन मार्केट एक्सीलरेटर के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर कौशिक देब, डॉ. रतीश मैनन (सदस्य सचिव, केएसपीसीबी), तेजस पटेल (मुख्य अभियंता, जीएसपीसीबी), एपिक इंडिया, एनईएमएल के प्रतिनिधि, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ एवं क्षेत्रीय अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक के रूप में एपिक इंडिया से डॉ. दिव्यांशु सैनी ने समन्वय की भूमिका निभाई।

कार्यशाला के पश्चात 19 जनवरी को ही अध्यक्ष आलोक गुप्ता की अध्यक्षता में मार्केट ओवरसाइट कमिटी की प्रथम समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल, एमिशन मार्केट एक्सीलरेटर के प्रतिनिधि तथा मंडल के वरिष्ठ और क्षेत्रीय अधिकारी शामिल रहे। यह कमेटी राजस्थान में एमिशन ट्रेडिंग स्कीम को लागू करने की नीतिगत, तकनीकी और प्रशासनिक रूपरेखा तैयार करेगी।

 

19 जनवरी को आयोजित यह कार्यशाला इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राजस्थान में प्रदूषण नियंत्रण अब केवल नियमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पारदर्शी, वैज्ञानिक और बाजार-आधारित व्यवस्था के जरिए उद्योग और पर्यावरण—दोनों के हितों को साथ लेकर आगे बढ़ेगा।

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