
सुमित जुनेजा,
- जयपुर | 19 जनवरी 2026 | बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की नींव
वन मंत्री संजय शर्मा का सख्त संदेश: अब फाइल नहीं, फील्ड में दिखेगा काम – टाइगर रिजर्व, अवैध खनन, विस्थापन, वृक्षारोपण सब पर टाइम-लाइन तय
राजस्थान में वन और वन्यजीव संरक्षण को लेकर अब “समीक्षा नहीं, निर्णायक कार्रवाई” का दौर शुरू हो गया है। माननीय वन मंत्री श्री संजय शर्मा की अध्यक्षता में अरण्य भवन, जयपुर में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय कार्यप्रणाली पर साफ शब्दों में दिशा तय कर दी गई। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि बजट घोषणाएं अब कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर समयबद्ध रूप से पूरी दिखनी चाहिए।
बैठक में टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए लागू संशोधित विस्थापन पैकेज को लेकर तीखे निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि पात्र परिवारों तक लाभ नहीं पहुँचना प्रशासनिक विफलता माना जाएगा और इसके लिए जिम्मेदारी तय होगी। पैकेज के प्रचार-प्रसार में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

वृक्षारोपण को लेकर भी दो-टूक रुख अपनाया गया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल पौधे लगाने से काम पूरा नहीं होता, उनकी जीवितता और क्षेत्रानुकूल स्थानीय प्रजातियों का चयन अनिवार्य होगा। नई तकनीक अपनाने और परिणाम आधारित निगरानी के निर्देश दिए गए, जिससे हर पौधा वास्तव में जंगल बने।
राज्य व केंद्र सरकार स्तर पर लंबित विकास कार्यों की स्वीकृतियों को लेकर भी कड़ा रुख दिखा। आपत्तियों की आड़ में फाइलें रोकने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और समन्वय के जरिए तुरंत स्वीकृति जारी कराने के निर्देश दिए गए।

अवैध खनन और अतिक्रमण को लेकर बैठक में साफ संदेश दिया गया कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ठोस कार्ययोजना बनेगी और कार्रवाई ज़मीन पर दिखेगी। साथ ही, ड्यूटी के दौरान किसी वन अधिकारी या कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में उनके आश्रितों को अनुकंपात्मक नियुक्ति में देरी को अस्वीकार्य बताया गया।
सोसायटी एक्ट के तहत पंजीकृत समितियों के चुनाव और लंबित विकास समितियों के पंजीकरण को लेकर भी समयसीमा तय करने के निर्देश दिए गए। रणथंभौर मॉडल पर सरिस्का में पर्यटकों के लिए सुगम मार्ग विकसित करने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने को कहा गया।

वन विभाग और बैंकों के साथ हुए एमओयू के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले सैलरी पैकेज के लाभों को छिपाने नहीं, बल्कि व्यापक रूप से साझा करने के निर्देश दिए गए, ताकि हर अधिकारी-कर्मचारी को उसका वास्तविक लाभ मिल सके।
बैठक के अंत में मंत्री ने साफ कहा कि अब सुझाव सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि नियमों के अनुसार कार्रवाई में बदलेंगे। यह समीक्षा बैठक एक संकेत नहीं, बल्कि चेतावनी है—राजस्थान में वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण अब ढिलाई नहीं, निर्णायक प्रशासनिक अनुशासन से चलेगा।



