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हाथीगांव में हाथी संरक्षण जागरूकता शिविर: बच्चों ने सीखा हाथियों का महत्व

राजस्थान के प्रसिद्ध हाथीगांव में आज एक अनूठा हाथी संरक्षण जागरूकता शिविर आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों छात्र-छात्राओं और वन्यजीव प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। यह आयोजन हाथियों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए किया गया था, जिसमें विशेष रूप से विद्यार्थियों को हाथियों के प्राकृतिक आवास, उनके पर्यावरणीय योगदान और संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसीएफ प्राची चौधरी ने बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि हाथी केवल जंगलों के राजा नहीं, बल्कि हमारे पूरे पारिस्थितिकीय तंत्र के संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि हाथियों का संरक्षण सिर्फ वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का दायित्व है कि वे इनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करें और इनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करें। उन्होंने बच्चों को समझाया कि यदि हाथियों की संख्या घटती गई, तो यह पूरे जंगल के लिए खतरे की घंटी होगी, क्योंकि हाथी “कीस्टोन स्पीशीज” माने जाते हैं, जिनका अस्तित्व पूरे जंगल की जैव विविधता को बनाए रखने में सहायक होता है।

इस शिविर में हाथीगांव के विभिन्न स्कूलों जैसे सार्थक पब्लिक स्कूल, सनफ्लावर एकेडमी, गंगा शिक्षा मंदिर और शंकर विद्यापीठ सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और हाथियों के संरक्षण को लेकर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। निबंध लेखन, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी प्रतिभा दिखाते हुए हाथियों के महत्व और उनके संरक्षण के उपायों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करते हुए एसीएफ प्राची चौधरी ने कहा कि बचपन से ही यदि बच्चों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए, तो वे भविष्य में पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं और इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में हाथीगांव के रेंजर जितेंद्र सिंह और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. अशोक तंवर भी उपस्थित रहे, जिन्होंने हाथियों की पारिस्थितिकीय भूमिका और वर्तमान में उनकी घटती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि हाथी न केवल जंगलों में बीजों का प्रसार करते हैं, बल्कि उनकी उपस्थिति से पूरे वन्यजीव पारिस्थितिकी को मजबूती मिलती है। यदि हाथियों की संख्या कम होती गई, तो इसका प्रभाव सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे अन्य वन्यजीव प्रजातियों का अस्तित्व भी खतरे में आ सकता है।

इस आयोजन का सबसे आकर्षक पहलू यह रहा कि सभी प्रतिभागियों को हाथी की सवारी करने का अवसर मिला, जिससे बच्चों को इन विशालकाय प्राणियों के करीब जाने और उनके स्वभाव को समझने का सुनहरा मौका मिला। बच्चों ने न केवल हाथियों को करीब से देखा, बल्कि उनके खानपान, सामाजिक व्यवहार और उनके संरक्षण की आवश्यकता को भी गहराई से जाना। इस अनुभव ने बच्चों के मन में हाथियों के प्रति प्रेम और जागरूकता को और अधिक गहरा कर दिया।

इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शिविर में आए सभी छात्रों ने पौधारोपण किया, जहां उन्होंने औषधीय और छायादार वृक्षों के पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार हाथी जंगलों को हरा-भरा बनाए रखने में सहायक होते हैं, उसी प्रकार हमें भी प्रकृति को संरक्षित रखने के लिए प्रयास करने चाहिए।

शिविर के समापन पर मुख्य अतिथि एसीएफ प्राची चौधरी ने आयोजकों, प्रतिभागियों और वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समाज को वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में इस तरह के और भी आयोजन होंगे, जिससे न केवल हाथियों बल्कि अन्य वन्यजीवों की भी रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

हाथीगांव में आयोजित यह शिविर हाथियों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा और विशेष रूप से बच्चों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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